भारत में चुनाव मतलब जमकर एक दूसरे पर शब्दों का हमला।क्या सत्ता पक्ष, क्या विपक्ष और क्या उसे प्रसारित करने वाला मीडिया, शब्द बोला एक बार जाता है मगर उसे चलाया 1000 बार जाता है। गुजरात चुनाव में बीजेपी प्रवक्ताओं का काम अकेले पीएम मोदी ही करते नज़र आ रहे है।

सबसे पहले इसकी शुरुआत अहमद पटेल से हुई, वही अहमद पटेल जिन्होंने राज्यसभा चुनाव को दिलचस्प बना दिया और गुजरात की जगह राज्यसभा में पक्की सीट की।

गुजरात चुनाव से पहले उनपर एक अस्पताल के कर्तादर्ता होने का दावा किया गया। साथ ही उसमें काम करने एक कर्मचारी का नाम जब ISIS से जोड़कर अहमद पटेल को मोदी सरकार ने चारों तरफ से घेर लिया था।

आरोप के अगले दिन अस्पताल ने सफाई पेश कि अहमद पटेल साल 2013 में अस्पताल के पद से इस्तीफा दे चुके है। बीजेपी का ये दाँव औंधे मुहं जा गिरा।

गुजरात चुनाव से ठीक पहले राहुल गाँधी की ताजपोशी पर कांग्रेस नेता शहजाद पूनावाला विरोध में उतरे, प्रधानमंत्री ने मौका हाथो-हाथ लपक लिया और उसी शहजाद के हिम्मत की तारीफ करने लग गए जो कुछ ही दिनों पहले इंडिया गेट पर प्रधानमन्त्री मोदी की ऐसी आलोचना कर रहे थे कि कटुता कि अधिकता देख कर  कांग्रेस ने भी एक वक़्त में किनारा कर लिया था।

कई अख़बारों और पत्रकारों ने लिखा, लगता है मोदी भूल गए हैं वो किसी पार्टी के नेता मात्र नही हैं जो हर बात को जनता के बीच जाकर उगलने लग जाएँ, वो प्रधानमंत्री हैं , ऐसे किसी भी मसले पर, जिसका कोई आधार न हो उसपर कैसे बोला जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सलमान निजामी के एक विवादास्पद बयान को महिसागर में रैली में लोगों के सामने मोदी जी ने  उठाया।

इसका जिक्र करते हुए रैली में कहा, ‘सलमान निजामी पूछा रहा है कि मोदी बताओ, तुम्हारा बाप कौन, तुम्हारी मां कौन है? ऐसी भाषा तो कोई दुश्मन के लिए भी इस्तेमाल नहीं करता है।?

मैं बताता हूं मेरी मां कौन है।।। भारत माता। जीवनभर इसकी सेवा की। मुझसे पूछते हो मेरा बाप कौन-मां कौन। मुझे नीच कहा गया, क्या आपको ये मंजूर है? गुजरात के बेटे के बारे में कोई ऐसी भाषा बोले तो क्या आप उसे माफ करेंगे?’

पीएम मोदी गुजरात चुनाव में वो सभी मुद्दे भूल गए हैं जिसे दिखाकर वो गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री बने हैं।

नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री होंगे जिन्होंने गुजरात के काम बताने के लिए हजारों करोड़ खर्च किया है और चुनाव प्रचार में अपनी भाषा शैली को अब तक के सबसे निचले स्तर पर ले गए हैं।

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