भारतीय राजनीति की मर्यादा का स्तर दिन-प्रतिदिन नीचे गिरता जा रहा है। भारतीय राजनीति में अक्सर ज्वलंत मुद्दें रहे हैं लेकिन राजनेताओं ने सत्ता की दौड़ में उस तरह से कीचड़ कभी नहीं उछाली थी जिस तरह से अब उछाली जा रही है। इसलिए इस स्तर को नीचे गिराने के ज़िम्मेदार राजनीतिक मुद्दें नहीं बल्कि नेता हैं।

इसमें केवल उन प्रवक्ताओं की बात नहीं की जा सकती जो आजकल ट्विटर से लेकर टीवी चैनल द्वारा डिबेट के नाम पर चलाए जा रहे हैं ड्रामों में गंदगी फैला रहे हैं, बल्कि इस सब के लिए ज़िम्मेदार इस राजनीतिक फ़ौज के वो सेनापति पहले हैं जिनके कहने और इशारों पर ये सब हो रहा है।

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद की चुनावी प्रक्रिया को औरंगज़ेब राज बताया। पीएम मोदी ने कहा “मैं कांग्रेस को उनके औरंगज़ेब राज के लिए शुभकामनाएं देना चाहता हूं।” उन्होंने अपने इस बयान के लिए कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के बयान से जुड़ा बताया, जबकि मणिशंकर का बयान अलग था।

खैर ये एक अलग विषय है लेकिन अगर मणिशंकर का बयान ये भी होता तो क्या प्रधानमंत्री को इसे दोहराना चाहिए था, क्या ये उनके पद की गरिमा को शोभा देता है? ये पहली बार नहीं जब पीएम मोदी ने ऐसा किया हो। हाल ही में वो गुजरात विधानसभा चुनाव के चलते ऐसी कई प्रतिकिर्याएँ दे चुके हैं जो उनकी गरिमा के दायरे से बाहर हैं।

इससे पहले उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के मोरबी दौरे को लेकर आधा सच बताते हुए बयान दिया था। फिर राहुल गाँधी के सोमनाथ मंदिर के दौरे को लेकर पीएम मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु का नाम चुनाव में उछाला था। हालांकि इन दोनों ही मामलों की सच्चाई अलग है।

ये अपने बहुत दुखद है कि गुजरात में जीतने की चाह में पीएम मोदी तमाम मुद्दों पर बात न करते हुए इन मुद्दों को आगे कर और अर्धसत्य बोलकर अपनी गरिमा के साथ खेल रहे हैं। वो स्वयं 15 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। क्या इतने लम्बे अपने कार्यकाल के बारे में उनके पास गिनाने के लिए कुछ नहीं है जो इन्हें इतने नीचे स्तर की बयानबाज़ी की ज़रूरत पड़ रही है।

भाजपा के प्रवक्ता भी इस तरह के बयान दे रहे हैं जो आज से पहले कभी राजनीति के इस स्तर पर नहीं दिए गए। भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने राहुल गांधी को बाबर भक्त और अलाउद्दीन खिलजी का रिश्तेदार बताया है।

राव ने एक ट्वीट कर कहा, ‘अयोध्या में राम मंदिर का विरोध करने के लिए राहुल गांधी ने ओवैसियों और जिलानियों से हाथ मिला लिया है। राहुल गांधी निश्चित रूप से एक बाबर भक्त और खिलजी के रिश्तेदार’ हैं। बाबर ने राम मंदिर तोड़ा और खिलजी ने सोमनाथ को लूटा। नेहरू खानदान दोनों इस्लामी आक्रमणकारियों के पक्ष में खड़ा हुआ!’

क्या इस जैसे निराधार और बेतुके आरोप पहले राजनीति में कभी लगे हैं? ये बयान बेतुका और गिरे हुए स्तर का ज़रूर है लेकिन चौकाने वाला नहीं। क्योंकि जब पार्टी के सबसे बड़े नेता पीएम मोदी ही विपक्षी पार्टी के लिए औरंगज़ेब काल जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो पार्टी के एक प्रवक्ता से और क्या उम्मीद की जा सकती है।

जब भाजपा के सबसे बड़े नेता से लेकर प्रवक्ता तक राजनीति के स्तर को गिराने में लगे हैं तो इन्हें माननीय प्रधानमंत्री मोदी को लेकर बन रहे मज़ाक और उड़ाई जा रही खिल्लियों से भी एतराज़ नहीं होना चाहिए। और अगर वो इस स्तर की बयान बाज़ी नहीं चाहते हैं तो उन्हें पहले अपनी चुनावी भाषा और अपने प्रवक्ताओं पर ध्यान देना चाहिए।

भाजपा अक्सर बात-बात पर भारतीय संस्कृति की बात करती है। मुझे पूरा यकीन है कि हमारी संस्कृति कभी भी हमें इस स्तर पर गिरने के लिए मजबूर नहीं करती। और अगर कोई इस स्तर पर गिरकर भी भारतीय संस्कृति की बात करे और अपने ऊपर दिए गए बयानों की आलोचना करे तो फिर ये दोगलेपन और सत्ता खोने के डर से ज़्यादा कुछ नहीं है।

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