सीबीआई जज बृजमोहन लोया की संदिग्ध परिस्थतियों में मौत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में अब नये सबूत और गवाह सामने आ रहे हैं। अब इस मामले में लोया के एक दोस्त ने नया खुलासा किया है।

बता दें, कि लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले को देख रहे थे। इस मामले में मुख्य आरोपी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें की कार्रवाई गुजरात से बाहर करने का आदेश दिया था जिसके बाद ये मामला सीबीआई अदालत में आया।

यहाँ इस मामले को देख रहे पहले न्यायाधीश उत्पत ने अमित शाह को मामले की कार्रवाई में उपस्थित न होने को लेकर फटकार लगाई थी। लेकिन अगली तारीख से पहले ही उनका ट्रान्सफर हो गया।

इसके बाद बृजगोपाल लोया आये, उन्होंने भी अमित शाह के उपस्थित न होने पर सवाल उठाए और सुनवाई की तारीख 15 दिसम्बर 2014 तय की लेकिन 1 दिसम्बर को ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद न्यायधीश एमबी गोसवी आये, जिन्होंने दिसम्बर 2014 के अंत में ही अमित शाह को इस मामले में बरी कर दिया।

लातूर बार एसोसिएशन में वरिष्ठ वकील और जस्टिस लोया के कॉलेज में सहपाठी रहे उदय गावारे ने ‘द कारवां’ पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा कि, जस्टिस लोया इस मामले को लेकर काफी दबाव में थे और उन्होंने मुझसे कहा था कि वो इस्तीफा देकर गाँव आ जाएँगे लेकिन गलत  फैसला नहीं देंगे। “लोया काफी हसमुख मिजाज़ थे लेकिन मैंने पहली बार उन्हें इतनी टेंशन में देखा था।”

उन्होंने बताया कि लोया दिवाली की छुट्टियों में लातूर आते थे। 2014 में जब वो लातूर आए थे तब ही उदय से भी मिले थे। उदय ने बताया कि लोया ने कहा था कि इस मामले में सबूत तो बहुत हैं लेकिन ये एक हाईप्रोफाइल केस है। लोया ने उनसे कहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश मोहित शाह उनपर इस मामले को लेकर दबाव बना रहे हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले लोया के परिवार वालों ने द कारवां को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मोहित शाह ने लोया से 100 करोड़ रुपये रिश्वत के एवज़ में आरोपियों के पक्ष में फैसला देने के लिए कहा था।

उदय गवारे ने दावा करते हुए बताया कि लोया के अंतिम संस्कार में वहां मौजूद जज, वकील, पुलिसकर्मी सब यही बात कर रहे थे कि लोया की मौत दिल का दौरा पड़ने से नहीं हुई है।

बता दें, कि हाल ही में लातूर में 150 वकीलों और लातूर बार एसोसिएशन के 1700 सदस्यों ने जस्टिस लोया की मौत की स्वतन्त्र जांच कराने की मांग को लेकर रैली निकाली थी। वहां वकीलों के एक समूह ने ज़िला कलेक्टर को अपनी मांग को लेकर ज्ञापन भी सौपा। इस सन्दर्भ में लातूर बार एसोसिएशन प्रस्ताव भी पास कर चुकी है।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने पाटिल ने कहा है कि जांच की मांग का ज्ञापन भारत के मुख्य न्यायाधीश, मुंबई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के संसद के नेता को भेजी जाएंगी।” पाटिल ने कहा: “यदि स्वतंत्र जांच नहीं करी गई, तो फिर बार आगे की कार्रवाई का का फैसला करेगी। “अगर इससे कोई परिणाम नहीं मिलता है, तो हम उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करेंगे।”

लोया की मौत की जांच की मांग बढ़ती जा रही है। पूर्व बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश बीएच मार्लापल्ले और दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ए.पी शाह भी इस मामले में जांच की मांग कर चुके हैं है।

पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास, पूर्व भाजपा नेता अरुण शौरी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सीपीआई (मार्क्सवादी) भी मामले की जांच चाहते हैं। लेकिन मोदी सरकार अभी तक जांच को लेकर चुप्पी साधे हुए है।

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