एक बेसहारा,लाचार कई दिनों से बैंकों की कतारों में लगकर जब अपने पुराने नोट नहीं बदला पाई तो किसी ने राहत देते हुए कहा कि, अभी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में 31 मार्च तक नोट बदले जाएंगे।

इस आस में वह फुली नहीं समाई क्योंकि 8 नवंबर के बाद कागज के मोल हो चुके चंद रुपए उसकी दिन-रात मेहनत की कमाई थे। जो उसने अपने खून पसीने से कमाए थे।

लेकिन जब वह 4 जनवरी की सुबह आरबीआई दफ्तर के सामने पहुंची तो उसकी आस एकदम टूट गई जब उसने सुना कि यह नोट आरबीआई में भी नहीं बदले जाएंगे। वैसे वहां पहले से भी कई रिटायर्ड व कामकाजी बुजुर्ग पहले से खड़े हुए थे लेकिन सब निराशा लेकर चुपचाप खड़े थे।

जब इस महिला ने इन तमाम लोगों को देखा तो इसकी आस एकदम टूट गई जिसके बाद वह अचानक गेट पर लगे सुरक्षाकर्मियों से नोट बदलने की विनती करने लगी। जोर-जोर से गिड़गिड़ाने लगी कि मेरे पास ये चंद नोट है आपकी मेहरबानी होगी बदलवा दीजिए। लेकिन गेट पर लगे गार्ड ने मना करते हुए वहां से जाने को बोल दिया।

इससे आहत होकर इस महिला ने गेट के सामने अपने कपड़े उतारकर खड़े हो जाना सही समझा। ताकि कम से कम इन आरबीआई वालों की तो नहीं चंद दूरी पर स्थित संसद में बैठने वाले व कानून बनाने वाले इन राजनेताओं की आंखे खुले की देखो एक फैसले के 57 दिन बाद भी महिलाएं सरेआम कपड़े उतारने पर मजबूर हैं।

आपको बता दें कि 8 नवंबर के नोटबंदी फैसले के एलान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात का जिक्र किया था कि आपलोग 30 दिसंबर तक बैंकों में व 31 मार्च तक आरबीआई ब्रांचों से अपना पैसा बदलवा सकते हैं लेकिन कुछ ब्रांचों में आरबीआई के पैसों की बदली हो रही है।

Loading...
loading...