आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पिछले दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर में कहा था कि, सेना को सैन्यकर्मियों को तैयार करने में छह-सात महीने लग जाएंगे, लेकिन आरएसएस के पास तीन दिन के भीतर ‘सेना’ तैयार करने की क्षमता है।

मोहन भागवत के इस बयान को सेना के अपमान से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष के नेता इस बयान की कड़ी आलोचना कर रहे हैं वही सोशल मीडिया पर भागवत के बयान का मजाक बनाया जा रहा है। लेकिन कुछ बुद्धिजीवी भागवत के बयान पर गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अशोक कुमार पाण्डेय ने अपने फेसबुक पर वॉल पर लिखा है कि ”भागवत के बयान को मजाकिया तरीक़े से ख़ारिज़ कर देना काफी नहीं है। इसके मर्म को समझना होगा, पंक्तियों के बीच पढ़ना होगा। यह स्पष्ट बताता है कि आर. एस. एस. ने देश के भीतर एक सशस्त्र ताक़त तैयार की है।

शाखाओं और शिविरों से इतर गोपनीय सैन्य बल जिसके पास हथियार है और ट्रेनिंग है, यह मामला पहले भी आया है कि आरएसएस के लोगों को पूर्व सैन्य अधिकारियों ने हथियारों के प्रशिक्षण दिये हैं।

आज जरूरत नहीं है, लेकिन कल अगर कोई विपरीत परिस्थिति आई तो यह सैन्य ताक़त हमारी भारतीय सेना को चुनौती दे सकती है, देश में उथल पुथल करने वाला गृहयुद्ध छेड़ सकती है। विभिन्न जाँच आयोगों ने जो इशारे किए हैं वे इस वृहत प्रयोजन का पूर्वाभ्यास हो सकते हैं।

इसकी प्रवृत्ति आई एस जैसी हो सकती है। संविधानेतर तरीक़ों से सत्ता पर कब्ज़ा करने के अलावा यह दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की हत्याएं कर सकती है… देश को अस्थिर कर सकती है।

मैं माननीय उच्चतम न्यायालय से इस बयान का संज्ञान लेते हुए भागवत को गिरफ्तार करने तथा अगर ऐसी सैन्य ताक़त खड़ी की गई है तो उसे ध्वस्त करने की कार्यवाही करने की अभ्यर्थना करता हूँ।”

Loading...
loading...