यूपी में सरकार बने अभी 4 महीने भी नहीं हुए कि योगी कैबिनेट ने अपना असली रुप दिखाना शुरू कर दिया है और साफ कर दिया कि शिक्षा जैसी बुनियादी चीजों पर काम करने के लिए उसके पास कोई बजट नहीं है। माध्यमिक शिक्षा बजट में आश्चर्यजनक रूप से 95% की कटौती और उच्च शिक्षा में 90%  की कटौती दिखाती है कि इस सरकार के लिए शिक्षा कोई मुद्दा नहीं है।

दरअसल पिछले साल अखिलेश सरकार में माध्यमिक शिक्षा के लिए 9990 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया था मगर इस सरकार ने सिर्फ 576 करोड़ का प्रावधान किया है। जो पिछले बजट के मुकाबले 9414 करोड़ कम है। या यूँ कहें कि 95% की भारी कटौती हुई है ।

दूसरी तरफ उच्च शिक्षा में भी ऐसे ही भारी कटौती की गई है। जहां पिछली बार अखिलेश सरकार ने 2742 करोड रुपए जारी किए थे इस बार आश्चर्यजनक रूप से मात्र 272.77 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। यानि कि 2469 करोड़ रुपए की भारी कटौती की गई जो उच्च शिक्षा के बजट में 90% कटौती है।

चुनावों के दौरान किए गए लैपटॉप के वादे का कोई प्रावधान ही नहीं किया गया लेकिन उससे भी ज्यादा गंभीर विषय है कि शिक्षा के लिए वित्तीय व्यवस्था रोककर योगी सरकार क्या करना चाह रही है।

हालांकि बेसिक शिक्षा के मामले में राहत की बात है। उम्मीद के मुताबिक उसमें बढ़ोत्तरी ही हुई है। बेसिक शिक्षा के लिए जहां पिछले साल 15632 करोड़ का प्रावधान किया गया था, इस साल इसे बढ़ाकर 21499 करोड रुपए किया गया है यानि कि इस बार 5867 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जो 37% ज्यादा है।

एक तो किए गए चुनावी वादों को पूरा नहीं किया गया, दूसरे कि शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत के बजट में आश्चर्यजनक रूप से भारी भरकम कटौती हैरान करती है और सवाल उठता है कि क्या योगी सरकार अशिक्षितों की फ़ौज खड़ी करना चाहती है! ताकि जाति और धर्म के नाम पर आसानी से बहकाया जा सके।

साभार- Financial Express

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