यूपी में भगवा परचम लहराए हुए दो महीने हो गए।  ऐसे में सवाल उठता है कि इन दिनों में देश के सबसे बड़े सूबे में क्या बदला है।

छेड़खानी , एंटी रोमियो और  भगवा ब्रिगेड

सरकार बनते ही योगी ने सबसे पहले जो बड़ा काम किया वह है ‘एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन’। नाम रोमियो जैसे प्रेमी पर होने की वजह से विवाद तो शुरु से ही हो गया लेकिन कामकाज के तरीके और भी मुसीबत में डालने वाले रहे हैं । मनचलों के नाम पर अधिकतर प्रेमियों को पकड़ा गया, परेशान किया गया और मारा पीटा गया । इतने दिनों में छेड़खानी करने वाले लफंगे कम हुए हों या नहीं , गुंडई करने वाली एक नई जमात खड़ी कर दी गई । जो जगह जगह पहुंचकर प्रेमी जोड़ों को परेशान करते हैं और खुद को योगी का दूत बताते हैं । यानी मोरल पुलिसिंग पर योगी ने राजनैतिक मुहर लगा दी है। अगर एंटी रोमियो स्क्वाड फेल नहीं हो रहा था तो अब सब कुछ ठंडा कैसे हो गया ? कहां चला गया एंटी रोमियो स्क्वाड ?
अब जगह – जगह पर दिखते हैं तो भगवा साफा में गुंडई करते हुए लोग।

साभार -Quora

समुदायों और जातियों में बढ़ा तनाव 

वैसे सांप्रदायिक तनाव तो हमेशा से रहा है । जिनमें यूपी के लिए सबसे बुरा रहा है 2013 में मुजफ्फरनगर का दंगा ।  उसके पहले और उसके बाद तमाम छोटी मोटी घटनाएं होती रही हैं । मगर योगी राज में जातीय संघर्ष भी अब जोरों पर है। इसे ही कहते हैं एक तो कड़वा करेला दूजे नीम चढ़ा। सहारनपुर में तो ठाकुरों के सिर पर वीरत्व और क्रूरता सवार है । वह अपनी पूरी ताकत दलितों पर धौंस जमाने के लिए लगा रहे हैं। महाराणा प्रताप के जन्मदिवस के अवसर पर जुलूस निकालने के बहाने मन में वर्षों से भरी कुंठा हिंसा के रूप में बाहर आई और  दलितों के दर्जनों घर जला दिए गए  ।

अब हर मोहब्बत को मिलता है मज़हबी रंग  

बुलंदशहर में एक हिंदू लड़की मुस्लिम युवक के साथ भागी तो बवाल ऐसे मचा कि भगवा ब्रिगेड के लोगों ने उस युवक के पड़ोसी पर हमला करके उसकी जान ले ली । इसका आरोप हिंदू युवा वाहिनी पर लगा है , जिसका योगी से क्या रिश्ता है ,बताने की जरूरत नहीं ।

गुरुवार रात को संभल में एक लड़की भगा कर ले जाने को लेकर दो समुदायों  के बीच इतना बवाल बढ़ा कि लगभग दस परिवारों को रातोंरात पलायन करना पड़ा।
पुलिस की मौजूदगी में लड़की पक्ष के लोगों ने एक समुदाय विशेष के घर में जमकर तोड़फोड़ की।

छोटे किसानों की क़र्ज़ माफ़ी 

योगी सरकार द्वारा जनहित का जो  सबसे बड़ा काम किया गया है वह है छोटे किसानों कि कर्जमाफी का एलान । माना जा रहा है कि इस कदम स यूपी के लाखों किसानों को फायदा पहुंचेगा । हालांकि इससे बड़े किसानों को कोई राहत नही मिलने वाली । साथ ही ये भी देखना होगा कि इतनी बड़ी राशि से राजकोष में घाटा का हवाला देकर फैसला लटका न दिया जाए।

बूचड़खानों पर रोक , ना तर्क ना तैय्यारी

योगी सरकार में सबसे ज्यादा चर्चित रहा बूचड़खानों पर प्रतिबंध । बूचड़खानों की दो कैटेगरी बताई गई – एक वैध, दूसरी अवैध । और अवैध बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगाया गया । इस काम का भी कोई ठोस आधार न बता पाने की वजह से हाई कोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाई और बूचड़खानों को लाइसेंस देने के आदेश दिए।

लालबत्ती पर रोक, दिखावा ही सही पर एक अच्छी पहल 

योगी सरकार में लालबत्ती के बेवजह इस्तेमाल पर रोक लगाकर वीआईपी कल्चर के खात्मे की ओर एक कदम बढाया गया है । हालांकि इससे वो नेता नाराज़ हैं जिनकी जिंदगी का एकै मकसद था – लालबत्ती का रुतबा । जब उनकी बारी आई तो व्यवथा ही ख़त्म ।

ख़ैर , अभी तो दो महीने हुए हैं , इतने कम समय में किसी के कार्यकाल का पूरा आंकलन नहीं किया जा सकता । इसलिए आगे देखना होगा कि योगी सरकार किस तरह काम करती है ।

समर राज

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