असल मुद्दों पर सवाल करने से बचती हुई मीडिया मंदिर और मस्जिद पर बहस करने को हमेशा से तरजीही देती रही है, जिसमें Zee News का नाम अव्वल है।

जैसे ही वसीम रिज़वी का बयान आया कि मंदिरों की जगह देश में 9 मस्जिद हैं और वहां पर फिर से मंदिर का निर्माण होना चाहिए, इसके बाद तो गोदी मीडिया ने इसको  बहस का सबसे जरूरी मुद्दा मान लिया और शुरू हो गई मंदिर और मस्जिद पर बहस।

Zee News के कार्यक्रम ‘ताल ठोक के’ में न सिर्फ ताल ठोकी जा रही थी बल्कि ललकारा जा रहा था, उकसाया जा रहा था।

एंकर किसी कारसेवक से कम नहीं लग रही थी, जो इतनी उतावली थी कि मानो मस्जिदों को तोड़कर मंदिर बनवा देना ही उनका एकमात्र मकसद है।

डिबेट में प्रमुख सवाल उठाया गया कि ‘राम मंदिर के रावण कौन ?’ और इसी हैशटैग को सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा है।

राम मंदिर पर इनकी राय से अलग जिसकी राय है ये उन्हें रावण की संज्ञा देने से बिल्कुल भी परहेज नहीं कर रहे हैं।

जितने भी सवाल उठाए गए वो सवाल कम और ललकारते हुए भड़काऊ बयान ज्यादा लग रहे थे। जैसे कि

1.क्या मौलानाओं की मेहरबानी का मोहताज है श्री राम मंदिर ?

चैनल और उसके कार्यक्रम की राजनीतिक मंशा का खुलासा इस बात से होता है कि उन्होंने एक अन्य सवाल में पूछा कि

2. 2019 से पहले होगा श्री राम मंदिर का निर्माण ?

अगर ये कार्यक्रम मंदिर और मस्जिद की बहस का था, लोगों की आस्था के मामले का था, आपसी समझौते का था ; तो उसमें 2019 का एंगल कहां से आया ?

जाहिर सी बात है कि राजनीतिक रूप से प्रेरित गोदी मीडिया ऐसे भड़काऊ सवाल करती है और राजनेताओं पर दबाव डालती है कि वह भी चुनावी राजनीति में धर्म और आस्था से जुड़े मामलों को लेकर आएं ।

कार्यक्रम के दौरान उठाए जाने वाले अन्य सवाल भी एकतरफा और पूर्वाग्रह से प्रेरित लग रहे थे।

जैसे कि कुछ अन्य सवाल-

कट्टरपंथियों ने उलझाया राम मंदिर का निर्माण ?

2019 में रखी जाएगी राम मंदिर की नींव ?

कट्टरपंथ पर कौन लगाएगा लगाम ?

दिलचस्प यह है कि इनमें प्रयोग की गई तस्वीरें अपने आप कार्यक्रम और चैनल के एजेंडे को दिखा रहे थे।

रूबिका लियाकत अली नाम की एंकर जैसे मोहरे से ऐसे भड़काऊ कार्यक्रम करवाकर अपना एजेंडा साधता हुआ गोदी मीडिया बेरोजगारों और प्रतियोगी छात्रों के सवालों को नहीं उठा पाता। जनसरोकार के मुद्दे पर डिबेट नहीं करता।

इनके लिए हिंदू-मुस्लिम, हिंदुस्तान-पाकिस्तान और मंदिर-मस्जिद ही डिबेट का बड़ा मुद्दा क्यों बन जाता है ?

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