राजस्थान में सत्ता परिवर्तन तो हो गया है लेकिन राज्य की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में 1 मार्च की सुबह पेड़ से बांधकर जला दिए गए एक मजदूर की लाश मिली है। लाश राख हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वारदात बिजौलिया थाना इलाके के मोगरावास गांव में हुई।

मृतक का नाम गंगाराम बताया जा रहा है। दलित समुदाय से गंगाराम पिछले 3 साल से कैलाश माइनिंग में बागवानी का काम करते थे। कैलाश माइनिंग राज्य की सत्ताधारी दल कांग्रेस के नेता की है। पुलिस मामले की लीपापोती में लगी है। मृतक के परिजन पुलिस को लिखित शिकायत देकर हत्या की आशंका जता रहे, वहीं पुलिस इसे आत्महत्या बताने पर तुली हुई है।

राजस्थान के जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने इस मामले के बारे में फेसबुक पर विस्तार से लिखा है। भंवर मेघवंशी लिखते हैं…

गरीब मजदूर को ज़िंदा जला दिया गया! राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के तिलस्वा में एक कांग्रेस नेता की खदान पर बागवानी का काम करने वाले दलित मजदूर गंगाराम बलाई को पेड़ से बांधकर ज़िंदा जला कर मार डाला गया है।

मृतक शाहपुरा क्षेत्र के ईटमारिया गांव का निवासी था। घटना बिजोलिया थाना क्षेत्र के बहादुर जी का खेड़ा के पास जंगल की है। कानून का डर खत्म होता जा रहा है, नेताजी ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पुलिस ने भी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तक छलांग लगा दी।

जातियों के नाम पर खेल कूद और उछल कूद करने वाले, रक्तदान ,प्रतिभा सम्मान करने वाले ठेकेदार भी अपने अपने दड़बों में छुपे रहे। कोई कुछ न बोला, सब खामोश है, जलाया गया इंसान एक आम मजदूर था, उसकी फिक्र न शासन को है और न ही प्रशासन को। शर्मनाक बात है। जंगलराज की स्थितियां हैं। तुंरत कार्यवाही हो,मृतक को मुआवजा मिले, वर्ना लोग आंदोलित होंगे।

पुलिस की भूमिका पर संदेह जताते हुए भंवर मेघवंशी लिखते हैं ‘निर्मम हत्या को आत्महत्या बता रही पुलिस! जिंदा जलाये गये मजदूर गंगाराम बलाई की जेब में सुसाईड नोट मिला है, शरीर जल गया, पेड़ जल गया, पर जेब मे कागज का टुकड़ा बचा रह गया!

मृतक अनपढ़ था,उसने सुसाईड नोट कैसे लिखा? मृतक अविवाहित था, तो उसने सुसाईड नोट में अपनी बेटी का ज़िक्र क्यों किया? कैसी अंधेरगर्दी है यह, सरकार बहादुर सुनती क्यों नहीं है?’

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दरअसल पुलिस का कहना है कि उन्हें शव की जेब में सुसाइड नोट मिला है। सुसाइड नोट के मुताबिक गंगाराम अपनी बेटी के मौत से आहत थे।

पहली बात तो ये कि लगभग पूरी तरह जल चुके गंगाराम की जेब में कागज पर लिखा सुसाइट नोट बचा कैसे रह गया, सुसाइन नोट क्यों नहीं जला? दूसरी बात ये कि गंगाराम की शादी ही नहीं हुई तो फिर बेटी पैदा कहां से हो गई और मर कैसे गई? तीरसी बात ये कि गंगाराम अनपढ़ था, उसे लिखने नहीं आता था तो फिर उसने सुसाइन नोट कैसे लिख दिया? वो अपनी सैलरी भी अंगूठा लगाकर उठाता था।

दैनिक भास्कर अखबार में गंगाराम के परिजनों हवाले से ये सभी बाते छपी हैं। और भी बहुत कुछ छपा है जिससे ये पता चलता है कि पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।
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