अभी कुछ दिन पहले ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने शहीद हुए एटीएस चीफ हेमंत करकरे के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे थे. साथ ही उन्होंने कहा था की इस बार वो चुनाव नहीं बल्कि ‘धर्मयुद्ध’ लड़ रही हैं. उनके इस विवादित बयान पर हल्ला मचने के बावजूद चुनाव आयोग चुप है.

इसी कड़ी में बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीजेपी, आरएसएस के साथ साथ चुनाव आयोग को अपने निशाने पर लिया है. उन्होंने ट्विटर का सहारा लेकर कहा कि मीडिया में साध्वी की ज़बरदस्त आलोचना के बाद भी चुनाव आयोग उनका नाम नहीं रद्द कर रहा है. इसके लिए मयावती ने बीजेपी और मोदी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

बता दें कि साध्वी प्रज्ञा ने कहा था की वो चुनाव नहीं लड़ रहीं, ‘मै एक भिक्षु हूं. मै इसे भगवान का आदेश मानती हूं. मै नेतागिरी करने नहीं आई. भगवान ने मुझे इस ‘धर्मयुद्ध’ में भाग लेने का निर्देश दिया है.’

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सोमवार को मायावती ने ट्वीट करते हुए कहा कि यही बीजेपी का असली चेहरा है. उन्होंने अपने ट्वीट मे लिखा है, ‘भोपाल से बीजेपी प्रत्याशी व मालेगांव ब्लास्ट आरोपी साध्वी प्रज्ञा का दावा है कि वे ’धर्मयुद्ध’ लड़ रही हैं. यही है बीजेपी/आरएसएस का असली चेहरा जो लगातार बेनकाब हो रहा है. लेकिन आयोग केवल नोटिसें ही क्यों जारी कर रहा है व बीजेपी रत्न प्रज्ञा का नामांकन क्यों नहीं रद्द कर रहा है?’

एक अलग ट्वीट में मायावती ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता का भार बीजेपी व नरेंद्र मोदी पर डाला. उन्होंने लिखा, ‘मीडिया की जबर्दस्त आलोचनाओं के बावजूद चुनाव आयोग अगर जनसंतोष के मुताबिक निष्पक्षता से काम नहीं कर रहा है तो यह देश के लोकतंत्र के लिए बड़ी चिन्ता की बात है व इस गिरावट के लिए असली जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि बीजेपी व पीएम श्री मोदी हैं जो गंभीर चुनावी आरोपों से घिरे हैं.’

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बता दें की बसपा प्रमुख ने इससे पहले प्रचार से बैन किए जाने के बाद चुनाव आयोग पर जातिगत भावना से काम करने का आरोप लगाया था. हालांकि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने हेमंत करकरे पर दिए उनके विवादित बयान को वापस लिया है पर ‘धर्मयुद्ध’ से जुडी किसी बात का ज़िक्र नहीं किया.

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