मंगलवार यूपी की राजधानी लखनऊ से जब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ कार्यक्रम में जाने के लिए रवाना हो रहे थे, तभी अखिलेश को यूपी सरकार ने रोक लिया। उन्हें फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया।

इसके विरोध में इलाहाबाद से लेकर दिल्ली तक सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किए। इलाहाबाद में यूपी पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं और सपा सांसद धर्मेन्द्र यादव पर लाठियां भांजी। पुलिस की बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज में सांसद धर्मेन्द्र यादव के साथ कई कार्यकर्ता लहूलुहान हुए हैं।

इस सब के बीच सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस के एक जवान की फोटो वायरल हो रही है। वायरल फोटो में प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं की तरफ पुलिस का एक सुरक्षाकर्मी बंदूक ताने हुए है।

यूपी सरकार की इस हरकत पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि, विरोध-प्रदर्शन करने पर संविधान की किस किताब में लिखा हुआ है कि सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों पर बन्दुकिया कार्यवाई करे या बंदूक ताने?

अखिलेश को रोकने वाली ‘पुलिस’ माल्या-नीरव और मेहुल भाई को क्यों नहीं रोक पाई, इनसे कोई रिश्तेदारी है क्या?

इस फोटो के वायरल होने पर अखिलेश यादव ने ट्वीट करके यूपी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि, “उत्तर प्रदेश सरकार की ठोको नीति केवल नौजवानों और छात्रों के लिए है।”

इस तस्वीर पर अखिलेश ने बोलते हुए लिखा है कि, “यह तस्वीर देखिये और यह बात जान लीजिए कि अब भाजपा कार्यकर्ता और बूथ से नहीं बल्कि बंदूक के जोर पर लड़ेगी।”

वहीं कल अखिलेश को इलाहाबाद जाने से रोके जाने के बाद उन्होंने कहा कि, “एक छात्र नेता के शपथ ग्रहण कार्यक्रम से सरकार इतनी डर रही है कि मुझे लखनऊ हवाई अड्डे पर रोका जा रहा है। छात्र संघ कार्यक्रम में जाने से रोकने का एक मात्र मकसद युवाओं के बीच समाजवादी विचारों और आवाज को दबाना है।“

जबकि, अखिलेश यादव को रोके जाने के तुरंत बाद मायावती ने ना सिर्फ योगी सरकार को लताड़ लगाई थी बल्कि समाजवादियों के साथ डटकर भाजपा का मुकाबला करने की बात भी कही है।

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