Adani
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‘केरल के पलक्कड़ में हथिनी के साथ बर्बरता की घटना से देशभर में रोष है’. ऐसी हेडलाइन कल तमाम न्यूज़ चैनल चलाते रहे. सत्ताधारी दल के आईटी सेल ने परसों सुबह डिसाइड किया कि अगले दो दिन मीडिया क्या चलाएगा ओर बिका हुआ मीडिया दो दिन लगातार आपके दिमाग में वही सीरिंज ठोकता रहा जो बीजेपी की आईटी सेल ने लगाने को दी थी.

घटना दुःखद है लेकिन लाखो मजदूरों का लॉक डाउन के दौरान सैकडो किलोमीटर का सफर तय करना और हजारों मजदूरों की मृत्यु हो जाना उससे भी ज्यादा दुःखद घटना है. कितने चैनलों ने यह हेडलाइन चलाई कि ‘हजारों मजदूरों की मृत्यु से देश भर में रोष का माहौल’?

आपको हथिनी की मृत्यु का दुख है लेकिन उन हजारों लाखों मजदूरों की दुख तकलीफों की फिक्र नही है? चलिए आपकी मर्जी है तो जानवरों की मृत्यु की ही बात कर लेते हैं. हथिनी तो दुर्घटनावश मारी गयी उसकी मृत्यु के पीछे कोई इंटेंशन नही था लेकिन क्या आपको अवनि बाघिन याद है 2018 में महाराष्ट्र के यवतमाल में एक तथाकथित आदमखोर बाघिन की अवनि को गोली मार दी गई और वह सिर्फ इसलिए कि वह उस क्षेत्र में रह रहीं थी.

जिसके आसपास अनिल अंबानी की रिलायंस को जमीन बेच दी गयी थी. जनवरी 2018 में मोदी सरकार ने अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप को सीमेंट फैक्ट्री लगाने के लिए यवतमाल के जंगल का 467 हेक्टयर दे दिया था. अवनि मार दी गयी उसके दो शावकों की भी मृत्यु हो गयी सिर्फ इसलिए क्योंकि उद्योगपति की जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके……

तो फिर चलाए अवनि बाघिन की मृत्यु पर राष्ट्रीय बहस?

अच्छा छोड़िए आपको तो हाथी ज्यादा अच्छे लगते हैं न, तो हाथियों की ही बात करते हैं आपने हसदेव अरण्य का नाम सुना है? यह जंगल छत्तीसगढ़ में है। भारत के सबसे ज्यादा घने और अनछुए जंगलों में हसदेव अरण्य का नाम लिया जाता है। हाथी, भालू जैसे न जाने के कितने जानवरों का यह घर है। लेकिन इस जंगल की जमीन के नीचे कोयला दबा हुआ है इस कोयले पर अडानी की नजर है यह जंगल बम्बई से भी बड़ा है यह एक लाख 70 हजार हेक्टेयर में फैला जंगल है।

इसके पारसा ब्लाक में खनन की अनुमति दे दी गई है। 842 हेक्टेयर वन क्षेत्र के लगभग एक लाख पेड़ काटे जा रहे हैं, पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता बताते हैं कि जहां परसा कोल ब्लाक है, हाथियों का विचरण क्षेत्र है।लेकिन मोदी जी के अभिन्न मित्र अडानी द्वारा किया गया खनन इस फॉरेस्ट एरिए को पूरी तरह से तबाह कर देगा.

तो आइए न्यूज़ चैनल वालो, केरल की हथिनी को तो हम नही बचा पाए लेकिन आप केरल की हथिनी जैसी 24 घण्टे रिपोर्टिंग करेंगे तो शायद हसदेव अरण्य के जंगलों में हाथियों के विचरण क्षेत्र को जरूर बचा सकते है. आप हसदेव अरण्य के जंगलों को बचाने की मुहिम चलाओ ?

आओ आईटी सेल के पेड कार्यकर्ताओं एक मासूम जानवर के मरने पर बड़ी करुणा उमड़ रही है न तुम्हारे मन में? तो आओ चलाओ अभियान. हम भी साथ देते हैं! वैसे भी हसदेव अरण्य का जंगल तो छत्तीसगढ़ में आता है जहाँ कांग्रेसी भूपेश बघेल की सरकार है तो फिर क्या देर-दार है कल से ही हसदेव अरण्य को बचाने का अभियान शुरू करो.

आओ भाई अक्षय कुमार, दो चार ट्वीट जरा हसदेव अरण्य के जंगलों में रह रहे हाथियों की सुरक्षा पर करो. चलिए बचाते है साथ मिलकर हाथियों के घर हसदेव अरण्य को. बोलो है हिम्मत?

(ये लेख पत्रकार गिरीश मालवीय के फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है)

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