Ravish Kumar
Ravish Kumar

मज़दूर भूखे क्यों चल रहे हैं? मज़दूरों को मुफ़्त में क्यों नहीं पहुँचाया गया? मज़दूरों का क्या होगा? मिडिल क्लास की सैलरी कम हो गई।उनके घर कैसे चलेंगे ? स्कूलों की फ़ीस कैसे दी जाएगी? मकान का लोन कैसे चुकता होगा? सवालों की फ़ेहरिस्त बहुत लंबी है। मगर जवाब एक ही है। हर सवाल का एक ही जवाब है।

एतद द्वारा सूचित किया जाता है कि ताज़ा सर्वे में प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता पहले से और अधिक बढ़ गई है। जब भी जनता संकट में होती है, प्रधानमंत्री की लोकप्रियता बढ़ जाती है। एक चैनल सर्वे कर डालता है। विजेता को फिर से विजयी घोषित कर देता है।

टाइम्स नाउ ने एक सर्वे किया है। अप्रैल में 71 प्रतिशत लोग कोविड-19 से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के फ़ैसलों से खुश हैं। इस बीच महामारी तेज़ी से बढ़ते जा रही है। मगर चैनल का सर्वे कहता है कि मई में उनकी लोकप्रियता 79 प्रतिशत बढ़ गई है। असफलताओं का अंबार लगा है लेकिन कोविड 19 से लड़ने में प्रधानमंत्री की रेटिंग 79 प्रतिशत हो गई है।

पहले वह चैनल ट्विट करता है। फिर मंत्री ट्वीट या री-ट्वीट करने लग जाते हैं। महामारी के पाँव तेज़ी से दौड़ रहे हैं। कई राज्य अब भी टेस्टिंग के मामले में पीछे हैं। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री ट्वीट कर रह हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता बढ़ गई है। कोविड-19 से लड़ने के उनके तरीक़े से जनता खुश हैं।

रेलवे दावा करती थी कि हर दिन एक करोड़ यात्री ढोती है। वो रेलवे दस दिन में साढ़े तीन लाख श्रमिकों को पहुँचा चुकी है। एक दिन में पैंतीस चालीस हज़ार मज़दूरों को ढो कर रेल मंत्री वाहवाही बटोर रहे हैं। सोलह लोग ट्रेन से कट कर मर गए। रेलमंत्री दो दिन बाद ट्वीट करते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता बढ़ी है।

प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का बढ़ना ही इस वक्त सारे सवालो का जवाब है।यह सवाल अब नहीं है कि साढ़े तीन लाख मज़दूर को ढो कर वाहवाही बटोरने वाले रेल मंत्री उन लाखों मज़दूरों के बारे में क्या कहेंगे जो कई दिनों से इस तपती मई में हज़ारों किमी पैदल चल रहे हैं? जो अपनी जेब से तीन से पाँच हज़ार किराया देकर ट्रकों में भूसे की तरह भरे गए है। जो ट्रक उपभोक्ता का सामान ढोते थे अब मज़दूर ढो रहे हैं।

अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है। बेरोज़गारी बढ़ गई है। लोगों का आर्थिक जीवन अधर में है। मंत्री खुश हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता बढ़ गई है। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता को ही जीडीपी घोषित कर देना चाहिए। हर समय बढ़ती हुई नज़र आएगी। जब आप अपने जीवन में झाँकेंगे और वहाँ हर चीज़ पीछे जाती नज़र आएगी तो थाली बजाइयेगा कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता बढ़ रही है।

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