Unemployment
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तान्या यादव

दिल्ली और केंद्र सरकार के आपसी विवाद के बीच करीब 4 हज़ार शिक्षकों की नौकरी ताक पर है। कोरोना संकट में ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के अंतर्गत काम करने वाले शिक्षकों के सर पर बेरोज़गार होने का संकट भी मंडरा रहा है।

शिक्षकों का दावा है कि उनका डिपार्टमेंट बजट जारी न होने के कारण ही कांट्रैक्ट रिन्यू नहीं कर रहा। नतीजा ये है कि लगभग 3,700 शिक्षक बेरोज़गारी की मार झेल रहे हैं। MHRD की दलील है कि राज्य सरकार रिक्त पदों को जब तक भर नहीं देती, बजट जारी नहीं किया जाएगा। दूसरी तरफ, राज्य सरकार का कहना कि पदों को भरने के लिए DSSSB को प्रस्ताव भेज दिया गया है लेकिन कोरोना के चलते भर्ती प्रक्रिया को आगे नही बढ़ाया गया है।

आपको बता दें कि मोदी सरकार ने 2018 में सर्व शिक्षा अभियान , टीचर्स एडुकेशन, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान को मिलाकर समग्र शिक्षा योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के छात्रों के समग्र विकास पर काम होता है।

इस अभियान के अंतर्गत काम करने वाले शिक्षकों की सैलरी केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर देते है। इसमें केंद्र का 60% और राज्य की 40% हिस्सेदारी होती है। केंद्र सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान को समग्र शिक्षा अभियान में तब्दील किया था। अगर केंद्र सरकार अपने हिस्से का 60% बजट नही देती है तो राज्य सरकार पर ही बोझ बढ़ेगा।

साथ ही, मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा था कि कोरोना के वक्त में किसी की नोकरी नही जाएगी लेकिन आज 3700 परिवार अपनी जिंदगी से जूझ रहे है।

केंद्र और राज्य सरकारों की तनातनी के बीच शिक्षकों की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है। कोरोना संकट से जूझ रही दिल्ली में लगभग 3,700 लोगों के घर प्रभावित हो रहे हैं। देश को आत्मनिर्भर बनाने के दावों के बीच शिक्षकों से उनका काम छीना जा रहा है। इसमें मोदी सरकार और केजरीवाल सरकार, दोनों ज़िम्मेदार है।

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