बिहारः अलग-अलग जगहों पर चल रहे आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन में अब तक 4 आशा कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है। 2 की मौत ठंड से तो 2 की मौत दुर्घटना से हुई है। अपनी 12 सूत्रीय माँगो को लेकर आशा कार्यकर्ता पिछले 34 दिनों से हड़ताल पर हैं।

बिहार में लगभग 1 लाख आशा कार्यकर्ता महीने का 18 हज़ार वेतन और परमानेंट नौकरी समेत 12 सूत्रीय माँगो को लेकर हड़ताल पर हैं। कड़ाके की ठंड और ठिठुरन के बावजूद आशा कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं। लेकिन 4 आशा कार्यकर्ताओं की मौत के बाद भी सरकार की कुंभकर्णी नींद का न टूटना दुःखद ज़रूर है।

ग़ौरतलब है कि ये महिला आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाक़ो में सरकार के लिए कड़ी मेहनत और लगन से काम करती हैं। वो सरकार की National Rural Health Mission के तहत काम करती हैं। इसके बावजूद अगर बिहार में नीतीश-बीजेपी सरकार में इनकी अनदेखी की जा रही है तो ये अच्छी बात नहीं है।

बिहार में हो रहे आशा कार्यकर्ताओं के हड़ताल पर सुशासन बाबू नीतीश कुमार कतई गम्भीर नहीं हैं। अगर होते तो कार्यकर्ताओं को 34 दिनों से लगातार हड़ताल करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। सिर्फ़ हड़ताल ही नहीं हड़ताल में शामिल 4 महिला कार्यकर्ताओं की मौत भी हुई है। इस पर भी बिहार में जेडीयू-बीजेपी सरकार पर कुछ असर नहीं है।

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