एक तरफ देश के अमीरों का कर्ज माफ किया जा रहा है तो दूसरी तरफ़ किसानों पर बैंकों ने कर्ज अदायगी का शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बैंकों ने हज़ार कर्ज़दार किसानों को कर्ज़ अदायगी का नोटिस जारी किया है।

बैंकों द्वारा जारी किए गए नोटिसों में किसानों को 10 दिन के भीरत पैसा जमा करने के लिए कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर किसानों ने 10 दिन के अंदर पैसे जमा नहीं किए तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में ये भी कहा गया है कि किसानों के विरुद्ध की गई कार्रवाई में आने वाला खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा।

मामला उत्तर प्रदेश के बुदेलखंड का है। यहां केंद्र और राज्य सरकारें लगातार यह आश्वासन देती रही हैं कि बुंदेलखंड के किसानों पर कर्ज वसूली के लिए उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन इन आश्वासनों के बावजूद आर्यावर्त बैंक ने करीब 1000 कर्जदार किसानों से वसूली का नोटिस भेज दिया है।

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आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के नहरी शाखा प्रबंधक हरीकिशन गुप्ता ने बताया कि उनकी ब्रांच से लगभग एक हजार खाताधारकों को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि ये सब केसीसी धारक हैं। एक वर्ष से ज्यादा हो चुका है। ब्याज और मूलधन नहीं जमा किया। उन्होंने कहा है कि बैंक के उच्चधिकारियों के निर्देश पर नोटिस जारी किए हैं।

उदयी पुरवा निवासी राजू ने बताया कि उसके पिता श्रीपाल पुत्र जगदेव की मृत्यु हो चुकी है। कर्जमाफी के लिए उन्होंने बैंक में आवेदन किया था। ब्याज भी जमा कर दिया था, लेकिन कर्ज माफ नहीं हुआ। बैंक ने उसे 47,267 रुपये जमा करने का नोटिस भेजा है।

इसी तरह नहरी (महारानी) के किसान दादूराम प्रजापति को 44,500 रुपये, कंतू धोबी पुत्र भाऊ को 69,688 रुपये जागेश्वर पुत्र गोरेलाल को 1,90,000 रुपये, चंद्रपाल पुत्र सुंदरलाल को 1,01,000 रुपये व रामकिशोर पुत्र सुंदरलाल (वैद्यनपुरवा) को 44,000 रुपये की नोटिस जारी किए गए हैं।

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किसानों ने बताया कि बैंक कर्मी नोटिस देने के साथ ही मौखिक भी खबरदार कर गए हैं कि 10 दिनों के अंदर ब्याज सहित अदायगी करें। नोटिस में कहा गया है कि स्वेच्छा से बैंक में जमा नहीं किया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इसमें आना वाला खर्च कर्जदार किसान से ही वसूला जाएगा।

इस मामले को लेकर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाडरा ने सत्तारूढ़ बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्विटर के ज़रिए कहा, “ये अन्याय और किसानों की पीड़ा देखिए। 40 हजार का कर्ज, ब्याज लगते-लगते 1 लाख हो गया। देश के धन्नासेठों का 5.5 लाख करोड़ कर्जा ये सरकार चुटकी में माफ कर देती है। मगर किसानों को कर्ज न चुका पाने पर मुकदमे की धमकी देती है। ये अन्याय खत्म होगा। अब होगा न्याय”।

बता दें कि हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार के शासनकाल में अमीरों की बैंक से क़र्ज़ लेकर न लौटाने की रक़म 5 गुना बढ़ी है। मार्च 2014 में यह रकम 39,504 करोड़ रुपए थी, जो दिसबंर 2018 में 1,61,213 करोड़ रुपए हो गई है।

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