उत्तर प्रदेश के कानपुर में संजीत यादव के अपहरण और हत्या मामले में अब राजनैतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

जहां सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे योगी प्रशासन की नाकामी बताया है वहीं योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर जातिवादी होने का आरोप लगाया है।

दरअसल पिछले महीने एक लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का अपहरण हो गया और फिरौती की कॉल आने लगी जिसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी तो पुलिस ने कहा कि फिरौती की रकम दे दीजिए जिसके बाद हम बदमाशों को रंगे हाथ पकड़ लेंगे।

लेकिन आरोप है कि बदमाश फिरौती की रकम लेकर भी भाग गए और पुलिस वाले उसे पकड़ भी नहीं सके। इसके बाद संजीत यादव को छोड़ा भी नहीं ।

हालांकि बाद में पीड़ित परिवार के परिजनों ने बयान दिया है कि फिरौती की रकम वाले बैग में पैसे नहीं थे।

यहां तक आरोप-प्रत्यारोप चल रहे थे लेकिन इसी बीच अब खबर आ रही है कि संजीत यादव की हत्या करके शव को नदी में फेंक दिया गया है, इसके बाद संजीत के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वो खुलकर योगी के पुलिस प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं।

इस मामले को तूल पकड़ता देख समाजवादी पार्टी के तमाम नेताओं ने योगी सरकार का घेराव शुरू कर दिया। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले को संज्ञान में लेते हुए लिखा-
कानपुर से अपहृत इकलौते बेटे की मौत की ख़बर दुखद है. चेतावनी देने के बाद भी सरकार निष्क्रिय रही. अब सरकार 50 लाख का मुआवज़ा दे.

सपा मृतक के परिवार को 5 लाख की मदद देगी.

अब कहाँ है दिव्य-शक्ति सम्पन्न लोगों का भयोत्पादक प्रभा-मण्डल व उनकी ज्ञान-मण्डली.

#PresidentRuleInUP

इसके पहले कल अखिलेश यादव ने इसी मामले पर लिखा था-
कानपुर से अपहृत युवक का अब तक कोई पता नहीं चला है. उप्र का शासन एवं पुलिस प्रशासन दोनों इस मामले में पूरी तरह से निष्क्रिय क्यों हैं? आशा है युवक सही सलामत अपने परिवार तक पहुँच पायेगा.

ये अपहरण भाजपा के राज के शर्मनाक क्षरण का प्रतीक है.

#NoMoreBJP

इन तमाम राजनीतिक बयानबाजियों का जवाब देते हुए योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘योगी आदित्यनाथ ऑफिस’ से लिखा गया-
कुलभूषणों की संवेदना जाति देखकर जाग्रत होती हैं। दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में भी जाति देखकर ही संवेदनाएं प्रकट करते हैं,यही वजह है कि जागरूक जनता ने जातिवादियों को नकारा, कुर्सी से हटाया और CM श्री @myogiadityanath जी को चुना।
सत्ता के लालच में अब वे बौखला गए हैं।
#योगीजी_का_सुशासन

इस बीच की जमकर आलोचना हो रही है कि जिनका काम कानून व्यवस्था को देखना था, जिनका काम प्रशासन की नाकामी पर माफी मांगते हुए व्यवस्था को दुरुस्त करना था, वही इस अपराधिक घटना में जाति का सवाल लेकर आ रहे हैं।

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