केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करिश्माई नेता बताते हुए इस बात का ऐलान कर दिया है कि जिस दिन पीएम मोदी राजनीति से संन्यास लेंगे, वह भी उसी दिन से राजनीति छोड़ देंगी।

ईरानी ने यह बात रविवार को महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित ‘वर्ड्स काउंट फेस्टिवल’ में एक सवाल के जवाब में कही। दरअसल, कार्यक्रम में उनसे पूछा गया था कि क्या वह ‘प्रधानसेवक बनने की रेस में हैं, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि कभी नहीं।

उन्होंने कहा, “मैं इस मामले में बहुत सौभाग्यशाली रही हूं कि मैं राजनीति में करिश्माई नेताओं के साथ काम करने आई थी और मैंने दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता के नेतृत्व में काम किया और अब मोदी जी के साथ काम कर रही हूं।”

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इसके साथ ही ईरानी ने कहा, “जिस दिन ‘प्रधान सेवक’ नरेंद्र मोदी राजनीति से संन्यास लेने का फैसला लेंगे, मैं भी उसी दिन राजनीति को अलविदा कह दूंगी।”

केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद उनके 2004 के उस बयान को याद किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफ़े की मांग की थी। कांग्रेस की सोशल मीडिया कॉर्डिनेटर हसीबा अमीन ने भी ईरानी के 2004 वाले बयान का ज़िक्र करते हुए उन्हें नाटकबाज़ बताया है।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “2004- मैं तब तक आमरण अनशन करूंगी जब तक नरेंद्र मोदी 2002 के दंगों के लिए गुजरात के सीएम पद से इस्तीफा नहीं दे देते।

2019- जिस दिन पीएम मोदी राजनीति छोड़ेंगे, मैं भी राजनीति छोड़ दूंगी”।

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उन्होंने आगे लिखा, “आप स्मृति को तुलसी से बाहर कर सकते हैं, लेकिन तुलसी को स्मृति से बाहर नहीं कर सकते”।

बता दें कि 2004 में स्मृति ईरानी ने गुजरात दंगों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को ज़िम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफ़े की मांग की थी और कहा था कि वह इसके लिए भूख हड़ताल करेंगी। हालांकि वह अनशन पर बैठी नहीं।

उससे पहले ही उन्होंने एक बयान जारी कर कहा, “मैंने गुजरात के बारे में जो बयान दिया था, मैं उसे वापस लेती हूं, मुझे लगता है कि पार्टी की एक ज़िम्मेदार सदस्य होने के नाते मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था”।

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