देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा एक और नया खुलासा कर दिया है। एक कंपनी का भारी भरकम लोन शेटलमेंट आधे रकम पर कर दिया जाता है।

उसके बाद कंपनी दिवालिया हो जाती है। रामदेव उस कंपनी को खरीद लेते हैं और उसी दिवालिया कंपनी को बैंक पुनः 3250 करोड़ रुपये का लोन दे देती है।

सरकारी तंत्र किस तरह से अपने पालतू पूंजीपतियों को खुश करने के लिए खजाने को चूना लगा रहा है, उसकी कहानी आपके सामने हैं।

रुचि सोया नामक कंपनी के बैंक लोन का एकमुश्त भुगतान के लिए स्टेट बैंक आॅफ इंडिया पर सरकारी दबाव का आरोप कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने लगा दिया है।

रुचि सोया कंपनी पर 1816 करोड़ रुपये का बैंक लोन था, जिसे महज 883 करोड़ रुपये में समाधान कर डाला गया।

कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि रुचि सोया कंपनी ने अलग अलग बैकों से 12,146 करोड़ रुपये का लोन लिया था।

इसमें भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक का नाम प्रमुख है। भारतीय स्टेट बैंक का अकेले इस कंपनी पर 1816 करोड रुपये का कर्ज था।

कर्ज की बढ़ती रकम के बाद बात समाधान की शुरु हो गई।समाधान के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक रुचि सोया से महज 883 करोड़ रुपया ही वसूली कर पाया। समाधान होते ही रुचि सोया ने अपनी कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया। असली कहानी यहीं से शुरु हुई।

कंपनी के दिवालिया घोषित होते ही इसकी बोली लगनी शुरु हो गई। बोली लगाने के लिए दो कंपनियां मैदान में उतरी।पतंजलि और वूलर्माक अडानी।

आश्चर्यजनक तरीके से अडानी समूह ने अपनी दावेदारी वापस ले ली और बोली लगाने से पीछे हट गई। अब इसके बाद रामदेव की पतंजलि मैदान में अकेले रह गई।

पतंजलि ने रुचि सोया को खरीद लिया। अब इस दिवालिया कंपनी को पुनः अलग अलग बैंकों से 3250 करोड़ रुपये का लोन मिल गया। लोन देने वाले बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक भी शामिल है।

कांग्रेस अब यही सवाल उठा रही है कि आखिर जो कंपनी दिवालिया घोषित हो चुकी थी, मालिक बदलते ही उसे इतना भारी भरकम लोन किसके दबाव में मिल गया ?

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सवाल पूछा और कहा कि आखिर क्या वजह है कि मोदी सरकार बाबा रामदेव पर इतनी मेहरबान है?

एक कंपनी डूब गई और उस डूबी हुई कंपनी में भारतीय स्टेट बैंक का भी पैसा डूब गया, उस कंपनी को खरीदने के लिए एसबीआई पैसे देने को तैयार कैसे हो गई ? कांग्रेस ने इसे पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here