कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर हुड्डा और कुमारी शैलजा के नेतृत्व में हरियाणा विधानसभा में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए जोरदार वापसी की है। एक महीने पहले तक हरियाणा की लड़ाई से दूर रहने वाली कांग्रेस की इस जीत का सबसे ज्यादा श्रेय भूपिंदर हुड्डा और उनके पूर्व सांसद बेटे दीपेंद हुड्डा को जाता है।

जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हरियाणा की कमान अशोक तंवर से लेकर भूपिंदर हुड्डा और कुमारी शैलजा के हाथ में सौंपी। चुनाव के दौरान 19 अक्टूबर को ही दीपेंद हुड्डा ने ट्वीट करके कहा था कि, “मेरे इस ट्वीट को सेव करना, हरियाणा खट्टर सरकार का घमंड तोड़ने जा रहा है।”

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नतीजे से एक दिन पहले यानि 22 अक्टूबर को दीपेंद दुबारा जीत का दावा करते हुए अपने ही ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कहा था, “मेरे एक हफ्ता पहले वाले इस ट्वीट को दुबारा सेव करना।”

नतीजे आने के बाद रोहतक से पूर्व सांसद दीपेंद हुड्डा ने कहा कि, “मैं जमीन से जुड़ा आदमी हूं। मुझे लोगों की नब्ज पता थी। लोगों ने मन बनाया था कि इस सरकार को सत्ता से बाहर करेंगे। मीडिया बार-बार बीजेपी को अच्छी से भी ज्यादा सीटें दिखाती थी।

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मीडिया कुछ लोगों को भ्रमित करने में सफल हुई। वर्ना लोग पूरी तरह से इस सरकार को निकालने का मन बना चुके थे। चुनाव से पहले हुड्डा साहब और कुमारी शैलजा के नाम पर घोषणा हुई तो लोगों को सकारात्मक विकल्प मिला।”

साथ ही दीपेंद हुड्डा ने बीजेपी पर हरियाणा में निर्दलीय उम्मीदवारों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने, कहा ज़्यादातर निर्दलीय उम्मीदवार हमारे साथ आना चाहते हैं, लेकिन बीजेपी उनपर दबाव बना रही है।

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