Airlines

कोरोना वायरस महामारी के चलते लोग जितने चिंतित उनके संक्रमण को लेकर हैं उस से ज़्यादा इस बात को लेकर कहीं वो बेरोज़गार ना हो जाएं। इन आर्थिक चिंताओं के चलते मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ रु. के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है लेकिन उसका ज़मीन पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है।

कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन लागू है और इसके ही कारण कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इन्ही में से एक है विमानन क्षेत्र, क्योंकि पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय हवाई उड़ानों को रद्द कर दिया गया है और धीरे-धीरे अब जाकर डोमेस्टिक फ्लाइट को अनुमति मिली है।

भारत में इस क्षेत्र के लोगों का कहना है मोदी सरकार किसी भी तरह से उनकी मदद नहीं कर रही है। शुक्रवार को CAPA इंडिया के लिए आयोजित एक सेमिनार में अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन संघ के महानिदेशक और सीईओ, अलेक्जेंड्रे डी जूनियाक ने कहा है कि जहाँ पूरे विश्व की सरकारें विमानन क्षेत्र के मदद कर रही हैं वहीं मोदी सरकार ने इंडियन एयरलाइन्स सेक्टर के लिए कुछ नहीं किया जबकि 30 लाख नौकरियां दाव पर लगी हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण पिछले साल की तुलना में राजस्व में 11% की कमी के साथ 2020 में एयर पैसेंजर की मांग में 47% की गिरावट आने की संभावना है। लगभग 3 लाख नौकरियां, जिनमें वे भी शामिल हैं जो विमानन पर निर्भर हैं, जैसे कि यात्रा और पर्यटन, जोखिम में हैं।

उन्होंने मोदी सरकार के आर्थिक पैकेज में इस क्षेत्र के लिए कुछ ना होने पर कहा कि यह विशेष रूप से निराशाजनक है कि इस महीने की शुरुआत में पेश किये गए आर्थिक राहत पैकेज में एयरलाइंस के लिए कुछ भी नहीं था।

उन्होंने विश्व के सनी देशों से तुलना करते हुए बताया कि अलग-अलग देशों में एयरलाइन्स सेक्टर के लिए 123 बिलियन डॉलर की घोषणा की गई है, जिसमें एशिया प्रशांत क्षेत्र देशों के 26 बिलियन डॉलर भी शामिल हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here