8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में बहुजन समाज पार्टी से जुड़े एक मुद्दे पर सुनवाई हुई। दरअसल साल 2009 में रविकांत नाम के एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मूर्ति निर्माण पर हुए करोड़ों के खर्च को बसपा से वसूलने की मांग की थी।

रविकांत चाहते हैं कि मायावती और बसपा चुनाव चिन्ह की मूर्तिर्यों (हाथी) के निर्माण पर हुए खर्च को बसपा से लिया जाए। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए आज यानी 8 फरवरी को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा हमारा प्रारंभिक विचार है कि मैडम मायावती को मूर्तियों का सारा पैसा अपनी जेब से सरकारी खजाने को भुगतान करना चाहिए।

न्यायपालिका की अवमानना एक्ट में प्रवधान है कि किसी न्यायिक आदेश की आलोचना कंटेप्ट ऑफ कोर्ट नहीं है। शायद इसी को आधार बनाकर स्वतंत्र लेखक विमल वरुण कोर्ट के मौखिक अवलोकन पर सवाल खड़े करते हुए फेसबुक पर लिखा…

‘कौन जज कह रहा है की बीएसपी ने अपना चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियां डॉ भीमराव जी आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल और दलित प्रेरणा स्थल में लगाई हैं। जो मूर्तियां वहां लगी हुई हैं वह बीएसपी के चुनाव चिन्ह से मिलती जरूर हैं लेकिन बीएसपी का चुनाव चिन्ह हैं नहीं।

बीएसपी का चुनाव चिन्ह खड़ा हाथी हैं जिसकी सूँड़ नीचे जमींन की तरफ है। जबकि इन स्थलों में लगे हाथियों की सूँड़ ऊपर की तरफ है, जो की स्वागत का प्रतीक है। क्या जज साहब को यह भी नहीं दिखता?’

इस फेसबुक पोस्ट के साथ विमल वरुण ने एक तस्वीर भी शेयर की है जिसे आप नीचे देख सकते हैं।

Image may contain: outdoor

वैसे बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अभी इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा वो प्रारंभिक विचार है, आदेश नहीं है। प्रारंभिक विचार और आदेश में बहुत फर्क होता है। इस मामले में अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी। मतलब अभी इस मामले में फैसला भी नहीं आया है।

अब सवाल उठता है कि अगर फैसला नहीं आया, कोर्ट ने आदेश नहीं दिया फिर मीडिया क्यों बार-बार ये लिख रहा है कि ‘सुप्रीम कोर्ट का आदेश, मूर्तियों पर खर्च हुआ जनता का पैसा मायावती वापस लौटाएं’

यहां नवभारत टाइम्स एक उदाहरण है। गूगल करने पर पता चलता है तमाम मीडिया संस्थानों ने ये गलती/जालसाजी की है। तो क्या यही वो लक्षण हैं जो मीडिया को गोदी मीडिया बनाते हैं?

मीडिया इस मामले में लगातार भ्रम फैला रहा है, जबकि सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहे बसपा सांसद सतीश मिश्रा मीडिया में बता चुके हैं कि चीफ जस्टिस ने जो भी कहा वो महज एक मौखिक अवलोकन है। जो आर्डर हुआ है वो ये है कि इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here