अंग्रेज़ी अख़बार The Hindu ने ख़ुलासा किया है कि राफ़ेल डील में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से हस्तक्षेप की जा रही ‘समानांतर सौदेबाज़ी’ को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। रक्षा मंत्रालय ने पीएमओ को ऐसा न करने की सलाह दी थी। अख़बार ने रक्षा मंत्रालय की एक कथित ख़ूफ़िया रिपोर्ट शेयर करते हुए ये सनसनीख़ेज़ ख़ुलासा किया है।

समानांतर सौदेबाज़ी का मतलब है कि राफ़ेल सौदे जब रक्षा मंत्रालय द्वारा बातचीत चल रही थी, इसके बावजूद पीएमओ की ओर से दख़ल दिया जा रहा था।

जैसा कि राफ़ेल डील में पहले से आरोप लगता आया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह डील HAL से लेकर अनिल अंबानी की कम्पनी रिलायंस एविएशन को दे दिया था। जो कि फ्रांस में हुए डील से सिर्फ़ 13 दिन पहले बनी थी।

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अख़बार के मुताबिक़ यह नोट 24 नवंबर 2015 को लिखा गया है। उस वक़्त मनोहर पर्रिकर रक्षामंत्री थे। उनके मंत्रालय ने पीएमो को लिखा था कि, इस तरह की समानांतर सौदेबाज़ी से रक्षा मंत्रालय और भारतीय सौदेबाज़ी दल की ताक़त कम होती है।

अख़बार के मुताबिक़ ख़ुद तत्कालीन रक्षामंत्री ने प्राइम मिनिस्टर ऑफ़िस को लिखे पत्र में कहा था कि, पीएमओ का रुख़ रक्षा मंत्रालय की रुख़ से बिलकुल उलट है। हम ये सुझाव देते हैं कि जो भी अफ़सर भारतीय सौदेबाज़ी दल के हिस्सा नहीं हैं वो फ्रांस सरकार से समानांतर बातचीत से परहेज़ करें।

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The Hindu के ख़ुलासे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी फिर से पीएम मोदी पर अक्रामक हुए उन्होंने पीएम पर हमला करते हुए कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी ने इस डील में वायुसेना के 30 हज़ार करोड़ रुपये चुराकर अनिल अम्बानी को दे दिए।

कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष डील की शुरूआत से ही इसमें घोटालेबाज़ी का आरोप लगाते रहे हैं।

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