केंद्र की मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पेश किया है। गरीब सवर्णों के लिए 10 फ़ीसदी का यह आरक्षण 50 फ़ीसदी की सीमा से अलग होगा। सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट ने इस संशोधन को मंज़ूरी दी थी।

2019 के लोकसभा चुनाव से चंद माह पहले लिए गए इस फैसले को ‘मोदी का मास्टरस्ट्रोक’ बताया जा रहा है लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (राजद) इसे चुनावी जुमला बता रही है।

हमेशा जाति के आधार पर आरक्षण की वकालत करने वाली राजद का कहना है कि ‘कुछ मूर्ख लोग कभी नहीं मिलने वाले 10% जुमले को मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं!

अगर 15% सवर्णों को 10% आरक्षण मिलेगा तो 70% आबादी वाले पिछड़ों को भी 65% आरक्षण मिले : RJD

अरे ये चुनावी झुनझुना है जो चुनाव तक खूब शोर मचाएगा और उसके बाद सदा के लिए शांत हो जाएगा! ऐसे तो संविधान में प्रावधान नहीं, अगर संशोधन हुआ तो बहुजन भी उसी समय अपनी आबादी के अनुपात में आरक्षण छीन लेंगे!’

बता दें कि जब से मोदी सरकार ने कोर्ट द्वारा निर्धारित आरक्षण की सीमा को लांघने की कवाद शुरू की है, तब से पिछड़ों के लिए आबादी के अनुपात में आरक्षण की मांग तेज हो गई है।

7 दिसंबर को जैसी ही ये बात सामने आयी की मोदी सरकार सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाली है वैसे ही राजद के तरफ ट्वीट आया कि…

‘आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है, भाजपा के संविधान मनुस्मृति में होगा! मोदी सरकार ने सवर्णों को एक और जुमला थमा दिया! भाजपा दलित पिछड़ा विरोधी चरित्र जाहिर! अगर 15% आबादी वालों को 10% आरक्षण मिलेगा तो 70% आबादी वाले पिछड़ों को भी 65% आरक्षण मिले!’

‘मोदी सरकार ने जातिगत जनगणना की रिपोर्ट इसीलिए सार्वजनिक नहीं की क्योंकि बहुजन समाज की आबादी इसके अनुसार 85% पाई गई! भौचक्की भाजपा इसी वास्तविकता को छुपा पिछड़ा दलित आदिवासी समाज की हक़मारी के लिए नए नए मनुवादी हथकण्डे अपना रही है! आज का जुमला उसी दिशा में एक कदम है!’

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here