आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह आरक्षण के मुद्दे पर राज्यसभा में जमकर गरजे। उन्होंने कहा कि 70 साल का इतिहास उठाकर देख लीजिए।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस से लेकर सुप्रीम कोर्ट के तमाम जज, ऐसे चंद परिवार हैं जिनका नाम उंगलियों पर गिना जा सकता है, जिन परिवारों के लोग सुप्रीम कोर्ट के जज बनते हैं, हाईकोर्ट के जज बनते हैं।

संजय सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या न्यायपालिका के अंदर चंद परिवारों का क़ब्ज़ा जारी रहेगा?

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ये एक सामाजिक बुराई है। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट में जजों के पद पर बस कुछ परिवारों के लोग क़ाबिज़ है। ज़ाहिर है संजय सिंह का निशाना कॉलेजियम सिस्टम पर था।

कॉलेजियम सिस्टम के तहत हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील काम कर रहे लोग ही बिना किसी जज की परीक्षा पास किए जज के पद तक पहुँच जाते हैं।

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इनमें ज़्यादातर कुछ चंद परिवारों के लोगों ही कब्ज़ा है। यही वजह है कि दलित, पिछड़े अति पिछड़े लोग न्यायपालिका के उच्च पदों पर नहीं पहुँच पाते हैं।

कल हम आपको बताएंगे क्या कॉलेजियम सिस्टम और किस तरह इससे न्यायपालिका के पदों में पारदर्शिता का सवाल खड़ा होता है।

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