बेटी होना एक चुनौती है लेकिन अब लग रहा है उत्तर प्रदेश में बेटी होना काफी बड़ी चुनौती है।

शायद उत्तर प्रदेश में बेटी होना ऊपर से दलित होना सबसे बड़ी चुनौती है।

बात हाथरस की बेटी से शुरू करते हैं। जीभ काटकर, हड्डियाँ तोड़कर दरिंदगी करना फिर उसके बाद उस बेटी का मर जाना। क्या इतना काफी नहीं है एक सरकार के लिए जो कि इसके बाद भी लगातार एक बेटी के खिलाफ खड़ी नजर आ रही है।

दरअसल बीते शुक्रवार को हाथरस की बेटी के आरोपी जिन्हें वहशी-दरिंदे कहना ठीक रहेगा क्योंकि इनका वहशीपन के चर्चे आज पूरी दुनिया में हो रहे हैं।

इन आरोपियों के समर्थन में 12 गांव के लोग इकट्ठे हुए। इन लोगों ने भरी पंचायत में एकमत से इन दरिंदों को बेगुनाह साबित भी कर दिया गया।

इस दौरान आरोपियों के परिजनों ने कहा कि हम इनका छुआ पानी नही पीते इनकी बेटियों को कैसे छुएंगे?

स्थानीय एनबीटी रिपोर्ट के मुताबिक पंचायत करने वालों ने नार्कों टेस्ट की मांग की वहीं सीबीआई जांच की मांग भी की है।

अब सवाल उठता है कि जब हाथरस प्रशासन पीड़ित परिवार को नजरबंद किए हुए है, मीडिया पर पाबंदी लगाए हुए है।

विपक्षी नेताओं से बदसलूकी पर उतर हुआ है। पीड़ित परिवार को किसी से मिलने नहीं दे रहा है।

तब ऐसे समय में आरोपियों के साथ इतनी नरमी सवाल खड़े कर रही है।

आपको बता दें कि, बलात्कार के आरोपियों के समर्थन में जम्मू कश्मीर के कठुआ में एक तिरंगा रैली निकाली गई थी। जिसकी अगुवाई खुद स्थानीय भाजपा के मंत्री,विधायक कर रहे थे।

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