जम्मू कश्मीर में इंटरनेट बंदी को लेकर आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान ले ही लिया। सुप्रीम कोर्ट ने आज मतलब पांच महीने पांच दिन बाद कश्मीर पर कहा-इसमें कोई संदेह नहीं है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की आजादी एक जरूरी टूल है। इंटरनेट तक पहुंच की आजादी भी आर्टिकल 19(1)(a) के तहत मौलिक अधिकार है।

दरअसल कोर्ट अगस्त महीने में जम्मू-कश्मीर पर उन पाबंदियों के खिलाफ याचिकाएं दायर हुई थीं। जिसमें याचिकर्ताओं में कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद भी शामिल थे उन्होंने जम्मू-कश्मीर मामले पर आए इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कहा है। आजाद ने कहा मोदी सरकार ने लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी और इस बार शीर्ष अदालत किसी दबाव में नहीं आई।

नेता प्रतिपक्ष आजाद ने कहा कि हम फैसले का स्वागत करते हैं। यह पहली बार है कि उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की दिल की बात कही है। उसने लोगों की नब्ज पकड़ ली है। मैं ऐतिहासिक निर्णय के लिए उच्चतम न्यायालय का धन्यवाद करना चाहता हूं। पूरे देश खासकर जम्मू-कश्मीर के लोग इसके लिए इंतजार कर रहे थे।

क्या है मामला ?

पिछले ही साल मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाते हुए विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म कर दिया था। इसके साथ कर्फ्यू लगाते हुए जम्मू कश्मीर में धारा 144 लागू कर दी गई थी और राज्य में इंटरनेट बैन कर दिया था हालाकिं कुछ दिन बाद कर्फ्यू हटा लिया गया, लेकिन इंटरनेट बैन और धारा-144 अभी भी जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में लागू है।

इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद समेत कई दूसरे  नेताओं और संस्थाओं ने जम्मू-कश्मीर में इन पाबंदियों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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