महाराष्ट्र में तमाम जतन के बावजूद बीजेपी दोबारा सरकार बनाने में नाकाम हो गई है। जिसके बाद आज महा विकास अघाड़ी (कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी गठबंधन) की सरकार बनने जा रही है। लेकिन नई सरकार के गठन से पहले ही मंत्री बनने जा रहे कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंसा कस गया है।

ED ने आदर्श सोसायटी घोटाले की जांच फिर से शुरू कर दी है। कोलाबा स्थित आदर्श सोसाइटी में बुधवार को ईडी के अधिकारी पहुंचे और माप लेना शुरू कर दिया। हालांकि चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने के राज्यपाल के आदेश को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। ऐसा दूसरी बार है जब ईडी के अधिकारी सोसाइटी के परिसर का दौरा कर रहे हैं।

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बता दें कि आदर्श सोसाइटी घोटाला वही घोटाला है, जिसके सामने आने के बाद अशोक चव्हाण को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब इस केस को फिर से खोले जाने से अशोक चव्हाण की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

ED की इस कार्रवाई के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर शुरु हो गया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि महाराष्ट्र में शिकस्त खाने के बाद बीजेपी ED का इस्तेमाल विरोधियों को परेशान करने के लिए कर रही है। साथ ही इस बात की मांग भी की जा रही है कि इसके साथ जज लोया का केस भी दोबारा खोला जाए।

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पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने ट्विटर के ज़रिए कहा, “जिस तरह शाह को अशोक चव्हाण की जांच के लिए विश्वसनीय सहयोगी प्रवर्तन निदेशालय मिल गया है। उद्धव ठाकरे को भी  जज लोया की रहस्यमय मौत को फिर से खोलना चाहिए। कई सवालों के जवाब दिए जाने की ज़रूरत है”।

क्या है आदर्श सोसायटी घोटाला?

महाराष्ट्र सरकार ने युद्ध विधवाओं और रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए इमारत बनाने का फैसला लिया था। जिसे आदर्श हाउसिंग सोसायटी का नाम दिया गया था। लेकिन इसके बनने के बाद आरटीआई में खुलासा हुआ कि नियमों की अवहेलना करते हुए इसके फ्लैट अफसरों और नेताओं को बेहद ही कम कीमत पर दिए गए थे।

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