लोकसभा चुनाव को अब ज़्यादा दिन नहीं बचे हैं। ऐसे में किस पार्टी के सिर केंद्र की सत्ता का ताज सजेगा और किस पार्टी को शिकस्त का सामना करना पड़ेगा, इसपर बहस तेज़ हो गई है।

देश के प्रमुख न्यूज़ चैनलों पर भी किस पार्टी की सरकार बनेगी, इसपर बहस जारी है। लेकिन यह बहस देश के मूड पर नहीं बल्कि नेताओं की धारदार ज़ुबान के आधार पर हो रही है। पार्टी के प्रवक्ताओं की ज़ुबानी स्डूडियो में बैठे एंकर देश का मूड समझने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि ऐसा नहीं है कि स्टूडियो में बैठे इन एंकर्स को देश की जनता के मूड की ख़बर नहीं है। एंकर्स को भी पता है कि देश की जनता में सत्ताधारी पार्टी के ख़िलाफ रोष है। वह जानते हैं कि जिस सत्ताधारी पार्टी का प्रचार वह स्टूडियो से बैठे कर रहे हैं ज़मीन पर जनता उसके कामों से नाराज़ है।

जनता सरकार से पांच साल के कामों का हिसाब मांग रही है। लेकिन जिस मीडिया को जनता की आवाज़ बनना चाहिए वह सत्ता की प्रवक्ता बन बैठी है और जनता की आवाज़ को एक तानाशाह सत्ताधीश की तरह दबाने में लगी है।

स्टूडियो से मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम, राष्ट्रवाद बनाम राष्ट्रद्रोह जैसे ग़ैर-ज़रूरी मुद्दों पर तो बहस की जा रही है, लेकिन स्टूडियो से सरकार के खिलाफ जनता के ग़ुस्से पर कोई चर्चा नहीं की जा रही। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि स्टूडियो से चर्चा नहीं होगी तो जनता की आवाज़ सुनाई नहीं देगी।

गोदी मीडिया भले ही सत्ता विरोधी जनता की आवाज़ को दबाने में जुटा हो, लेकिन जब गोदी मीडिया के पत्रकार स्डूडियो से निकलकर जनता के बीच जाते हैं तो वह जनता के आक्रोश को दबाने में नाकाम हो जाते हैं।

ऐसा ही कुछ हुआ एबीपी न्यूज़ के एंकर अनुराग मुस्कान के साथ। जब वह उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जनता के बीच यह पूछने पहुंचे कि ‘कौन बनेगा प्रधानमंत्री’ तो लोगों का ग़ुस्सा केंद्र की मोदी सरकार पर फूट पड़ा। जनता ने मोदी सरकार के पांच साल के कामकाज का हिसाब-किताब करना शुरु कर दिया।

किसी ने पूछा कि किसानों से किए वादे का क्या हुआ तो किसी ने कालेधन के बारे में पूछा। किसी ने रोज़गार सृजन के वादे को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। वहीं इस दौरान लोगों ने सरकार पर देश को लूटने का आरोप लगाते हुए ‘चौकीदार चोर है’ के नारे भी लगाए। देखें वीडियो….

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