2 मार्च को राफेल सौदे (Rafale Deal) पर लिखी गई किताब की विमोचन होने वाला था। किताब तमिल भाषा में और इसका विमोचन भी चेन्नई में होना तय हुआ था।

लेकिन किताब की लांचिंग हो इससे पहले चुनाव आयोग (Election Commision) के कुछ अधिकारियों ने विमोचन कार्यक्रम पर रोक लगाते हुए किताब जब्त कर लिया।

छापेमारी करने पहुंचे अधिकारियों का कहना था कि ‘Rafale: The Scam That Shook the Nation’ शीर्षक वाली किताब 11 अप्रैल से शुरू होने वाले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) के आचार संहिता का उल्लंघन है।

किताब के लेखक इंजीनियर एस विजयन हैं। मीडिया में रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस किताब का प्रकाशन हाउस CPIM से जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने किताब जब्त करते वक्त प्रकाशक को एक सादे पेपर बिना किसी  आधिकारिक के मुहर आदि के आदेश दिया कि किताब की लॉन्चिंग रद्ध की जाए।

इस मामले में ट्विस्ट तब आया जब घटना की चर्चा सोशल मीडिया और न्यूज वेब पोर्टलों पर होने लगी। सोशल मीडिया पर किताबों को जब्त करते हुए अधिकारियों की तस्वीर वायरल होने लगी। सवाल पूछा जाने लगा कि जब आचार सहिंता के दौरान मोदी पर बनी फिल्म रिलीज हो सकती है, नमो टीवी लॉन्च हो सकता है तो राफेल सौदे पर लिखी किताब क्यों नहीं?

मामले को बढ़ता देख तमिलनाडु के मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि हमने ऐसा कोई निर्देश ही नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि किताब जब्त करने से संबंधित न तो चुनाव आयोग ने न ही सीईओ ऑफिस ने किसी तरह के निर्देश दिए थे और ना लॉन्चिंग रोकने के लिए कहा था।

मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा, मैंने चेन्नई के जिला चुनाव अधिकारी को इस मामले में देखने और जल्द रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। वहां से जब्त की गई किताबों को बाद में लौटा दिया गया और शाम में किताब का विमोचन हुआ।

राफेल पर बड़ा खुलासा करने वाले ‘द हिंदू’ समूह के अध्यक्ष एन राम ने कहा कि जो कुछ भी सुबह हुआ वो पूरी तरह से गैरक़ानूनी और अलोकतांत्रिक है। ये ‘उड़न दस्ते’ के लोगों ने वेन्यु पर गए वहां लोगों को डराया, फिर मीटिंग कैंसिल करवा दी। फिर वो शोरूम में आकर 150 कापियां जब्त कर ली। अच्छा ये हुआ उन्होंने इसे फाड़ा या जलाया नहीं, लौटा दिया। मगर क्या आचार सहिंता एक तरफा कार्यवाई करने की इजाजत देता है?

क्योंकि राफेल डील कोई सांप्रदायिक मामला नहीं इसका किसी भी धर्म से कोई मतलब नहीं। मगर ऐसा क्यों हुआ कि नियमों का डर दिखाकर उन्होंने प्रकाशक और आयोजकों को धमकाया की वो केस लगा देंगें। जोकि किसी भी लोकतांत्रिक देश में बर्दास्त नहीं किया जा सकता। अब सवाल ये उठता है कि क्या चुनाव आयोग में बैठे अधिकारी सरकार के इशारों पर काम कर रहें है?

क्योंकि ये तो सिर्फ एक राज्य की हालत है पूरे देश में जहां कहीं भी चुनाव हो रहें है। वहां पर भी चुनाव आयोग ऐसे ही काम कर रहा होगा। ये मामला राफेल से जुड़ा था इसलिए सुर्खियों में आ गया वरना आयोग के अधिकारीयों पर कितना भरोसा किया जा सकता ये सवाल उठने लगे है।

फ़िलहाल चुनाव आयोग ने मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को सस्पेंड करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही राज्य में चुनाव आयोग ने अधिकारियों की नई टीम का गठित की है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here