deepak chaurasia
Deepak Chaurasia

जनता पत्रकार पर हमला करने लगे इससे बुरा कुछ नहीं है। यह सामूहिक रूप से पूरे मीडिया के लिए बहुत बहुत बुरा है।लेकिन ऐसी स्थिति लाया कौन है?

जनता को लोकतंत्र का असली मतलब समझना चाहिए और पत्रकार की आज़ादी का सम्मान करना चाहिए। एकदम ठीक बात है। लेकिन पत्रकार की जवाबदेही भी तय होगी कि नहीं?

अपने स्टूडियो में आपको लोकतंत्र नहीं याद आता है तो जनता को लोकतंत्र याद दिलाने का हक़ है आपको? क्या आपको आत्यंतिक आज़ादी मिली हुई है? क्या एक महीने से प्रदर्शन कर रही महिलाओं के बारे में अनाप शनाप प्रसारण का हक है आपको?

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“अम्बेडकर को जानो, सीएए को मानो” जैसा कार्यक्रम प्रसारित करने को लेकर भी जवाबदेही तय होगी कि नहीं? ऐसा कार्यक्रम प्रसारित करके आप उन लोगों के बीच गए थे जो अपनी नागरिकता छीन लिए जाने को लेकर भयभीत हैं। नोट में चिप, गाय का ऑक्सीजन और परमाणु हमले में बेसमेंट जैसे मजाक की भी कोई जिम्मेदारी तय होगी कि नहीं?

लोकतंत्र के 4 स्तंभों में सबसे धूर्त कौन है जो अपनी कोई जवाबदेही तय करने की जगह चरण वंदना में लगा है? मीडिया को लेकर कोई रेग्युलेशन आज तक क्यों नहीं है? झूठ फैलाने के प्रति कोई जवाबदेही क्यों नहीं है?

अम्बेडकर और गांधी के बहाने धर्म के आधार पर नागरिकता को सही ठहराने वाले लोग मीडिया के हितैषी हैं क्या? जिस सरकारी अराजकता में आप चीयर लीडर की भूमिका निभा रहे हैं, इस अराजकता का दरवाजा वहीं से खुला है कि जनता आपको पत्रकार मानने से इनकार कर दे।

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आज भी दुनिया मोटे तौर पर यह मानती है कि सरकारी प्रचार तंत्र का हिस्सा बनना पत्रकारिता नहीं है। जब आप कमल खिलाने के लिए कीचड़ में तब्दील हो गए तो जनता आपको चौथा खंभा कैसे मान लेगी?

मुझे लगता है कि जब तक आपकी जवाबदेही तय नहीं है, आप दूसरे पर जवाबदेह होने का दबाव नहीं डाल सकते। किस लोकतंत्र के भले के लिए स्टूडियो में दिन भर हिंदू मुस्लिम कार्यक्रम चलते हैं?

ये सवाल किसी एक पत्रकार से नहीं हैं, यह सामूहिक रूप से मीडिया की भूमिका का सवाल है।

  • कृष्णकांत

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