कर्नाटक की हाई प्रोफाइल सीट मानी जाने वाली दक्षिण बेंगलुरु से बीजेपी ने 28 साल के युवा तेजस्वी सूर्या का नाम तय किया है। संघ की शाखा में तैयार हुए तेजस्वी सूर्या कर्नाटक में बीजेपी की यूथ विंग के महासचिव हैं और पेशे से हाईकोर्ट में वकील।

बीजेपी द्वारा नाम की घोषणा होने के बाद से ही ये युवा मीडिया की सुर्खियों में है। पहले एक तस्वीर की वजह से, फिर एक ट्वीट की वजह से और अब एक वीडियो क्लिप की वजह से।

अब अगर तेजस्वी सूर्या की उस तस्वीर, ट्वीट और वीडियो को मिलाकर देखा जाए तो एक बहुत ही कट्टर हिंदूवादी, सामंतवादी, हिंसक, महिला विरोधी युवा की छवि उभर कर सामने आती है।

ये बात सही है कि युवाओं को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में आना चाहिए। लेकिन तेजस्वी सूर्या जिस हद तक महिला विरोधी और हिंसा सोच रखते हैं वो ठीक नहीं है। हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रयोगशाला में तैयार हुए एक लड़के से और क्या उम्मीद की जा सकती है।

चिंता की बात ये है कि मेनस्ट्रीम मीडिया ने तेजस्वी सूर्या की उस तस्वीर, ट्वीट और वीडियो को बहुत हल्के तरीके से रिपोर्ट किया है। शायद राजनीतिक के साथ साथ मीडिया में भी हिंसा, धार्मिक कट्टरता और महिला विरोधी बातें इतनी समान्य हो गई हैं कि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।

टिकट की घोषणा होने के बाद तेजस्वी सूर्या की जो पहली तस्वीर वायरल हुई उसमें वो ढ़ेर सारे धारदार हथियारों अपने सामने लिए बैठे थे। तस्वीर 2016 में आयुध पूजा के दौरान खींची गई थी। आयुध पूजा दक्षिण भारत में नवरात्रों के दौरान मनाए जानी वाली एक परंपरा है जिसमें लोग अपने हथियारों की पूजा करते हैं।

अब जरा दिमाग पर जोर देंगे तो याद आएगा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी नवरात्र के बाद यानी दशहरा को हथियार की पूजा करती है।

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एक युवा जिसे कायदे से शिक्षा, रोजगार, अहिंसा, समानता, न्याय, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मुल्यों की बात करनी चाहिए… वो हथियार की पूजा कर रहा है। लेकिन इस बात भी वही निष्कर्ष है- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रयोगशाला में तैयार हुए एक लड़के से और क्या उम्मीद की जा सकती है।

इस तस्वीर के बाद तेजस्वी सूर्या अपने एक पांच साल पुराने ट्वीट की वजह से चर्चा में आए। तेजस्वी ने 10 जून 2014 को एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने महिलाओं को लेकर अपनी संघी मानसिकता का प्रदर्शन किया था।

तेजस्वी ने संसद में महिला आरक्षण बिल से खुद को भयभीत बताया था। ट्वीट में लिखा था ‘संसद में महिला आरक्षण के मुद्दे को छोड़ दें तो मोदी सरकार का एजेंडा प्रेरणादायक है। मैं उस दिन की कल्पाना मात्र से ही डरता हूं जिस दिन महिला आरक्षण बिल अस्तित्व में आ जाएगा’

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हालांकि, अब तेजस्वी सूर्या ने अपने उस पुराने ट्वीट को अपनी टाइमलाइन से हटा दिया है। लेकिन इस ट्वीट से तेजस्वी सूर्या की महिला विरोधी मानसिकता का पता जरूर चल गया।

ख़ैर, पता तो एक और चीज का चल गया है। तेजस्वी सूर्या की एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें वो हिटलर की भाषा बोलते सुने और देखे जा सकते हैं। तेजस्वी पहले तो विपक्षी नेताओं को देशभक्त मानने से इंकार करते हैं। फिर विपक्ष के सभी नेताओं को घोटालेबाज, चोर, परिवारवादी आदि बताते है।

इन सब के बाद तेजस्वी सूर्या जो बोलते हैं उस हिसाब से देश की 69 प्रतिशत जनता एंटी इंडिया है। तेजस्वी कहते हैं यह चुनाव देश के आम नागरिकों की देशभक्ति का टेस्ट है। इस चुनाव में जो मोदी के साथ हैं वो इंडिया के साथ है, जो मोदी के खिलाफ है वो इंडिया के खिलाफ है।

अब ये क्या बात हुई। 2014 में बीजेपी को मात्र 31 प्रतिशत लोगों ने वोट दिए थे… तो इसका मतलब ये हुई कि फिलहाल देश में 69 प्रतिशत एंटी इंडिया लोग हैं?

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