योगी आदित्यनाथ जिस पुलिस के बूते उत्तर प्रदेश से अपराध को मिटाने का दावा करते हैं, वो ख़ुद अपराधी है! ये हम नहीं कह रहे, खुद बीजेपी के एक विधायक ने इस बात को माना है। विधायक का मानना है कि सूबे के कई पुलिसकर्मी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हैं, जिनके नाम अपराधियों की तरह ही उजागर किए जाने की ज़रूरत है।

दरअसल, बरेली से बीजेपी विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल ने सूबे के 10 ऐसे पुलिसकर्मियों की लिस्ट सार्वजनिक करने की मांग की है, जो अपराधियों के साथ मिलकर आपराधिक गतिविधियों को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने डीआईजी राजेश पांडेय को पत्र लिखकर कहा कि सूबे के टॉप 10 कुख्यात पुलिसकर्मियों के नाम सार्वजनिक कर उन पर कार्रवाई की जाए।

डीआईजी को लिखे अपने पत्र में विधायक ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अक्सर पुलिस निर्दोष लोगों पर कार्रवाई कर देती है और अपराधियों से साठगांठ कर अपराध को बढ़ावा देती है। जिले के सभी थानों में तैनात उन पुलिसकर्मियों के नाम सूचीबद्ध किए जाने चाहिए जोकि भ्रष्टाचार, खनन, तस्करी, जुआ-सट्टा, शराब व गोतस्करी, आदि कार्य में लिप्त हैं।

बता दें कि योगी सरकार के आदेश पर इन दिनों सूबे के हर जिले में टॉप-10 बदमाशों की लिस्ट बनाकर सार्वजनिक की जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

एक निजी समाचार चैनल से बात करते हुए बीजेपी विधायक ने कहा कि “कुख्यात पुलिस वालों की हरकतों से सरकार की छवि खराब होती है। इसलिए जहां एक तरह टॉप 10 कुख्यात अपराधियों की लिस्ट लगे वहीं बग़ल में टॉप 10 कुख्यात पुलिस वालों की भी लिस्ट लगाई जाए। क्योंकि यह लोग हमारी सरकार को बदनाम करते हैं।”

ग़ौरतलब है कि विकास दुबे के मामले के बाद से ही यूपी पुलिस सवालों के घेरे में है। विकास दुबे का साथ देने के आरोप में इंस्पेक्टर विनय तिवारी को गिरफ़्तार किया गया है। विकास दुबे की पत्नी ने भी इस बात का खुलासा किया है कि कई पुलिसकर्मियों की विकास के साथ सांठगांठ थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here