देश में आई कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान कोरोना मरीजों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। इन परेशानियों के कारण लाखों की तादाद में कोरोना मरीजों को दुनिया से अलविदा कहना पड़ा।

इस दौरान देश में कोरोना वैक्सीन और इससे संबंधित अन्य दवाओं की किल्लत का मुद्दा भी गरमाया रहा।

दरअसल इस संदर्भ में भाजपा नेता की गौतम गंभीर फाउंडेशन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने अनधिकृत रूप से फैबीफ्लू दवा का भंडारण, खरीद और वितरण किया है।

इस पूरे मामले की जांच दिल्ली सरकार के ड्रग कंट्रोलर द्वारा की जा रही है। बताया जाता है कि ड्रग कंट्रोलर ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है। जिस पर अगली सुनवाई 29 जुलाई को होने वाली है।

इस मामले की जांच कर रहे ड्रग कंट्रोलर का कहना है कि गौतम गंभीर फाउंडेशन और ड्रग डीलरों के साथ-साथ ऐसे अन्य मामलों में भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली हाईकोर्ट का कहना है कि ड्रग कंट्रोलर को यह पता लगाना चाहिए कि जब कैसे एक शख्स द्वारा फेबीफ्लू दवा की दो हजार पत्तियां खरीदना संभव हो पाया।

जबकि देश में इस दवा की पहले से ही तंगी चल रही थी। दुकानदार द्वारा इस दवा को कैसे मुहैया करवाया गया ?

दिल्ली हाईकोर्ट ने इसके साथ यह भी कहा है कि भाजपा नेता गौतम गंभीर ने इसे अच्छी मंशा के साथ किया है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या उनका ये बर्ताव जिम्मेदाराना था? जबकि आपको भली-भांति पता था कि इस दवा की किल्लत चल रही है।

भले ही उन्होंने यह अनजाने में ही किया। लेकिन यह तरीका बिल्कुल भी सही नहीं है कि आप बाजार से बड़ी तादाद में दवाएं खरीद कर रख ले।

आपको बता दें कि ड्रग कंट्रोलर ने भाजपा नेता गौतम गंभीर को इस मामले में पहले क्लीन चिट दे दी थी। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर ड्रग कंट्रोलर को फटकार लगाई और दोबारा से जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश जारी किया था।

इसके साथ ही ड्रग कंट्रोलर को फटकार लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर आप इस मामले में जांच नहीं कर सकते तो हम किसी और को इसकी जिम्मेदारी दे सकते हैं।

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