लगभग पिछले एक साल से शिवसेना पीएम मोदी और बीजेपी पर हमला कर रही थी। शिवसेना लगातार राफेल, रोजगार, जीएसटी, राममंदिर… आदि के मुद्दों पर नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचना कर रही थी।

इसी बीच 24 दिसंबर, 2018 को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था ‘ऐसा लगता है कि चौकीदार चोर हो गया है।’

उद्धव ठाकरे के इस बयान के बाद लगा अब बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन तो नहीं ही होगा। क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ‘चौकीदार चोर’ वाला जुमला प्रधानमंत्री मोदी के लिए उछालते हैं। ऐसे में मोदी को चोर कहने वाली पार्टी से बीजेपी तो गठबंधन नहीं ही करेगी।

लेकिन बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के अपमान का घूट पी लिया। और अब बीजेपी-शिवसेना में लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का बटवारा भी हो चुका है। लेकिन उठता है कि बीजेपी को ऐसी क्या मजबूरी हो गई जो पीएम मोदी को ‘चोर’ कहने वाली पार्टी से गठबंधन करना पड़ा?

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क्या बीजेपी को लोकसभा चुनाव के हार का डर सता रहा है? अगर नहीं तो फिर इतने बवाल के बाद शिवसेना से गठबंधन की वजह क्या है? क्या बीजेपी को अब कथित मोदी लहर पर भरोसा नहीं है।

ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बीजेपी बिहार में भी बैकफुट पर आकर गठबंधन कर चुकी है।

बिहार की कुल 40 सीटों पर जेडीयू और भाजपा बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। 40 सीटों में से भाजपा और जेडीयू 17-17 और एलजेपी 6 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू को मात्र 2 सीटे मिली थी और भाजपा को 22 ।

वहीं एलजेपी और आरएलएसपी ने भी जेडीयू से ज्यादा सीटे जीती थी। तब एलजेपी को 6 और आरएलएसपी 3 सीटों पर कामयाबी मिली थी। ऐसे में सवाल उठना तो लाजमी है कि आखिर 22 सीटों वाली भाजपा 2 सीटों वाली JDU के सामने क्यों सरेंडर हो गई?

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बसपा सुप्रीमो मायावती ने इन्हीं सवालों को उठाते हुए लगातार दो ट्विट किए हैं। उन्होंने लिखा है ‘बीजेपी द्धारा लोकसभा चुनाव हेतु पहले बिहार फिर महाराष्ट्र व तमिलनाडु में पूरी लाचारी में दण्डवत होकर गठबंधन करना क्या इनके मज़बूत नेतृत्व को दर्शाता है? वास्तव में बीएसपी-सपा गठबंधन से बीजेपी इतनी ज़्यादा भयभीत है कि इसे अब अपने गठबंधन के लिये दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है।’

‘लेकिन भाजपा अब चुनाव के समय में चाहे लाख हाथ-पांव मार ले, इनकी ग़रीब, मज़दूर, किसान व जनविरोधी नीति व इनके अहंकारी रवैये से लगातार दु:खी व त्रस्त, देश की 130 करोड़ जनता इन्हें अब किसी भी क़ीमत पर माफ करने वाली नहीं है। जनता इनका घमण्ड चुनाव में तोड़ेगी व इनकी सरकार जायेगी।’

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