बेटियों के खिलाफ पंचायतें हो रही हैं, आरोपियों से भाजपा सांसद मिलने जा रहे हैं। अब बताइए बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी।

यह सवाल उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में पूछा जा रहा है। चाहे हाथरस हो या बलरामपुर, भदोही, बुलंदशहर, कानपुर, उन्नाव, महाराजगंज से लेकर राजधानी लखनऊ तक बेटियां और बेटियों के परिजन सरकार से सवाल पूछ रहे हैं।

अगर एक बेटी को न्याय दे दिया जाता तो शायद दूसरी बेटी न्याय मांगने के लिए ना खड़ी होती।

हाथरस में एक बेटी को न्याय नहीं मिला तो दूसरी बेटी भी न्याय की गुहार लगाती इस दुनिया से चली गई।

मामला थाना सादाबाद के मई जटोई की निवासी 6 वर्षीय बेटी का है। करीब 15 दिन पहले अलीगढ़ के इगलास में बेटी से बलात्कार किया गया।

बलात्कार के बाद बेटी को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन उस बेटी को बचाया नहीं जा सका। आज उसकी मौत हो गई।

गुस्साए परिजनों ने मासूम बेटी के आरोपियों को सजा दिलाने व पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया।

अब सवाल उठता है कि, अगर 7 दिन पहले हाथरस की बेटी के मौत पर सीख ले ली गई होती तो शायद दूसरी गलती नहीं होती।

जब आरोपियों के पक्ष में सैकड़ों लोग पंचायतें करेंगे तो बेटियों के साथ ऐसी घटनाएं कभी नहीं रूकेंगी।

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