अब उत्तर प्रदेश का ‘हाथरस’ अतंरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। इस खबर पर कई विदेशी अखबारों व न्यूज पोर्टल ने खबर लिखी है।

लेकिन जितने हाथरस पर सवाल उठ रहे हैं उससे ज्यादा भाजपा शासित उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की कारगुजारियों पर सवाल उठ रहे हैं।

ऐसा क्या है इस घिनौने हादसे के पीछे जिसे पूरी सरकार दबाना चाहती है।

पहले 8 दिन तक गैंगरेप का केस नहीं दर्ज किया गया। फिर अच्छे अस्पताल में बेटी का इलाज नहीं कराया गया।

बेटी की मौत के बाद उसके शव को बगैर परिजनों के इच्छा के अनुसार गैर रीति रिवाज आधी रात पेट्रोल डालकर जला दिया गया।

शव जलने के बाद डीएम से लेकर तमाम आला अफसर परिवारजनों को धमकी दे रहे हैं।

पूरा सरकारी तंत्र मरने के बाद बेटी के साथ गैंगरेप की घटना को नकारने के लिए लगा दिया गया।

विपक्ष को परिजनों से मिलने नहीं दिया गया। अब खबर आ रही है कि गांव के बाहर पुलिस ने किला बना दिया है।

इस किलेबंदी से बाहर ना कोई सबूत निकलेगा, ना शख्स मीडिया को अंदर ना जाने से रोका जा रहा है। इस तरह से पाबंदी लगा दी है।

कोई साक्ष्य या सबूत परिवार वाले ना दे दे इसलिए उन्हें भी बंधक बनाकर धमकाया और मारा जा रहा है।

इन तमाम बिंदुओं के बाद तो सवाल उठते है कि क्या आखिरकार ऐसा है जो दबाया, छुपाया या मिटाया जा रहा है।

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